July 11, 2026

इन 5 मुहूर्त में ना करें बजरंगबली की पूजा, जानिए पूजा विधि, मंत्र, आरती व संपूर्ण हनुमान चालीसा- अजय मिश्रा

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हनुमान जयंती 2021:

इन 5 मुहूर्त में ना करें बजरंगबली की पूजा, जानिए पूजा विधि, मंत्र, आरती व संपूर्ण हनुमान चालीसा

 

 

नई दिल्ली :

 

 

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जा रही है। इस साल यह तिथि आज यानी 27 अप्रैल दिन मंगलवार को है। इस दिन को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। इस दिन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही भक्त बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए व्रत भी रखते हैं। हनुमान जयंती के दिन चैत्र पूर्णिमा होने से इस दिन का महत्व और बढ़ रहा है। इस साल हनुमान जयंती पर सिद्धि योग बन रहा है। शास्त्रों में सिद्धि योग को शुभ योगों में गिना जाता है। इस योग के दौरान मांगलिक कार्यों को किया जाता है।

 

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन विशेष तरह के प्रयोगों से ग्रहों को भी शांत किया जाता है। शिक्षा, विवाह, कर्ज और कोर्ट-कचहरी आदि के मामलों के लिए यह दिन खास माना जाता है। हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी के साथ भगवान श्रीराम की भी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से हनुमान जल्दी प्रसन्न होते हैं। इस दिन रामचरितमानस और बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किन्धा कांड, सुन्दर कांड, लंका कांड एवं उत्तरकांड का भी विशेष पाठ किया जाता है।

 

★ हनुमान जयंती 2021 शुभ मुहूर्त-

 

चैत्र पूर्णिमा – मंगलवार, अप्रैल 27, 2021

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 26, 2021 को 12:44 पी एम बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त – अप्रैल 27, 2021 को 09:01 ए एम बजे

 

 

★ आज के अशुभ मुहूर्त-

 

राहुकाल- 03:22 पी एम से 05:01 पी एम तक।

यमगण्ड- 08:50 ए एम से 10:28 ए एम तक।

गुलिक काल- 12:06 पी एम से 01:44 पी एम तक।

दुर्मुहूर्त- 08:11 ए एम से 09:03 ए एम तक।

वर्ज्य- 01:03 ए एम, अप्रैल 28 से 02:28 ए एम, अप्रैल 28 तक

 

 

हनुमान कवच मंत्र

“ॐ श्री हनुमते नम:”

 

सर्वकामना पूरक हनुमान मंत्र

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।

 

★ पूजा विधि

 

हनुमान जयंती के दिन सुबह-सवेरे उठकर सीता-राम और हनुमान जी को याद करें। पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करें: ‘ॐ श्री हनुमंते नम:’। हनुमान जी को सिंदूर और लाल वस्त्र व जनेऊ, लाल फूल चढ़ाएं। हनुमान जयंती के दिन रामचरितमानस के सुंदर कांड और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। पूजा के आखिर में हनुमान जी की आरती करें।

हनुमान जी को पान का बीड़ा चढ़ाएं। इमरती, चूरमा, गुड़ चने, केले, पंच मेवा का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है।

 

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★हनुमान जी की आरती

 

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥

 

अंजनिपुत्र महा बलदायी, संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सिया सुधि लाये॥

 

लंका-सो कोट समुद्र-सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे, सियारामजी के काज संवारे॥

 

लक्ष्मण मूर्छित परे सकारे, आनि संजीवन प्रान उबारे॥

पैठि पताल तोरि जम-कारे, अहिरावन की भुजा उखारे॥

 

बाएं भुजा असुरदल मारे, दहिने भुजा सन्तजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारे, जय जय जय हनुमान उचारे॥

 

कंचन थार कपूर लौ छाई, आरति करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरति गावै, बसि बैकुण्ठ परम पद पावै॥

 

 

 

★ हनुमान चालीसा

 

दोहा

 

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

 

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार

बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार

 

★ चौपाई

 

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥

 

राम दूत अतुलित बल धामा

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥

 

महाबीर बिक्रम बजरंगी

कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥

 

कंचन बरन बिराज सुबेसा

कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥

 

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे

काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥

 

शंकर सुवन केसरी नंदन

तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥

 

विद्यावान गुनी अति चातुर

राम काज करिबे को आतुर॥७॥

 

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया

राम लखन सीता मनबसिया॥८॥

 

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा

विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥

 

भीम रूप धरि असुर सँहारे

रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥

 

लाय सजीवन लखन जियाए

श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥

 

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई

तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥

 

सहस बदन तुम्हरो जस गावै

अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥

 

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा

नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

 

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥

 

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा

राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥

 

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना

लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥

 

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू

लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥

 

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही

जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥

 

दुर्गम काज जगत के जेते

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥

 

राम दुआरे तुम रखवारे

होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥

 

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना

तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥

 

आपन तेज सम्हारो आपै

तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥

 

भूत पिशाच निकट नहि आवै

महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥

 

नासै रोग हरे सब पीरा

जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥

 

संकट तै हनुमान छुडावै

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥

 

सब पर राम तपस्वी राजा

तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥

 

और मनोरथ जो कोई लावै

सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥

 

चारों जुग परताप तुम्हारा

है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥

 

साधु संत के तुम रखवारे

असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

 

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता

अस बर दीन जानकी माता॥३१॥

 

राम रसायन तुम्हरे पासा

सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥

 

तुम्हरे भजन राम को पावै

जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥

 

अंतकाल रघुवरपुर जाई

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥

 

और देवता चित्त ना धरई

हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥

 

संकट कटै मिटै सब पीरा

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥

 

जै जै जै हनुमान गुसाईँ

कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥

 

जो सत बार पाठ कर कोई

छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥

 

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा

होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥

 

तुलसीदास सदा हरि चेरा

कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

 

★ दोहा

 

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥