वाराणसी। ‘सिंघम’ मूवी आपने देखा होगा। इस फिल्म के एक सीन में बाजीराव सिंघम अपने अधिकारियों से बोलता है कि अगर पुलिस वाला चाह ले तो मंदिर के बाहर से चप्पल तक चोरी नहीं हो सकती। बात इतर है कि रियल और रील लाइफ में अंतर होता है। असल जिंदगी में रिटेक का मौका नहीं मिलता। फिल्मी पुलिस की अपेक्षा असली पुलिस पर हमेशा आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं। कभी सुनाई देता है कि एक थानेदार प्लाटिंग करा रहा है, अपने थाना क्षेत्र में। कभी पता चलता है कि कोई थाना प्रभारी अपने कारखास से रोज ₹20 हजार ले रहा है, महीने की होने वाली ऊपरी कमाई का हिस्सा भी उसे बढ़ाकर चाहिए। कभी सुनने में आता है कि एक थानेदार ने अपने थाना क्षेत्र में गाड़ियों से बंद हुई वसूली को चालू कराने के लिए दिन रात एक कर दिया है। सिक्के के हमेशा दो पहलू होते हैं। जहां गलत लोग हैं वहीं सही लोग भी हैं। साल के पहले दिन वाराणसी जिले में ऐसा ही कुछ देखने को मिला। पुलिस वालों की वजह से एक बच्चे की जान बच गई।
दरअसल मंडुआडीह थाना क्षेत्र के ककरमत्ता पुल पर मंगलवार को तकरीबन 11:30 बजे सफारी गाड़ी ने स्कूटी सवार मामा भांजे को टक्कर मार दी। भांजा आदित्य मिश्रा (14 वर्ष) निवासी चितईपुर जख्मी हो गया। पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस के वक्त पर न पहुंचने के कारण डायल 100 की गाड़ी से घायल बच्चे को बीएचयू ट्रामा सेंटर भेजा।
कौशल मिश्रा निवासी जौनपुर अपनी बहन के यहां चितईपुर आये थे। भांजे ने सारनाथ घुमाने को बोला। वह स्कूटी से भांजे आदित्य को लेकर चले तभी ककरमत्ता पुल पर मंडुआडीह चौराहे की तरफ से जा रही सफारी गाड़ी स्कूटी को धक्का मारते हुए पुल के रेलिंग से टकरा कर रुक गयी। बच्चे के जख्मी होने के बाद सफारी सवार मौके से भाग निकले।
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