*राजनेता बनाने वाले कार्यकर्ताओं को दो जून की रोटी मयस्सर नहीं..!*
*व्यापक संघर्ष रचना और बलिदान की आवश्यकता..!!*
*भ्रष्ट नेताओं पर भी शिकंजा कसना..!!*
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राजनीति में भले ही कोई ऊंचा मुकाम हासिल कर ले लेकिन उसके अंदर राजनीतिक शुचिता नही है तो वह व्यर्थ है! आज सांसदों विधायकों की खरीद फरोख्त होती है! राजनेताओं के घर से इतने नोट बरामद हो रहे हैं कि नोट गिनने वाली मशीन भी हांफ रही है!जब ईडी विजिलेंस राजनेताओं को पकड़ती है तो सीधे आरोप एक दूसरे पर लगता है कि उन्हें तंग बदनाम किया बदला लिया जा रहा है और उनके समर्थक ऐसा मान कर हंगामा खड़ा करते हैं! यह भी सही है कि सत्ता पक्ष के भ्रष्ट नेताओं पर भी शिकंजा कसना चाहिए इससे जांच संस्थाओं की साख बनी रहेगी! यह प्रश्न है कि कुछ राजनेताओं के पास राजनीति उद्योग से इतना पैसा हो गया है कि हर रोज दोनों हाथों से ऐयाशी में लुटा रहे हैं! मगर राजनेता बनाने वाले कार्यकर्ताओं को दो जून की रोटी मयस्सर नहीं हो रही है!राजनीतिक शुचिता के लिए जरूरी है आमूल सफाई! यह वर्तमान स्थिति में संभव नहीं लगता तो फिर? कोई पूरी पार्टी में राजनीतिक शुचिता का संकल्प करा ले तब भी ऐसा नहीं होने वाला! हमारे ज्यादातर राजनीतिक दल इस अवस्था में जा चुके हैं जहां से उन्हें जनसेवा देशसेवा जैसे उदात्त लक्ष्यों और उसके अनुसार मूल्य निर्धारित करने की स्थिति में नहीं लाया जा सकता वास्तव में इसके लिए व्यापक संघर्ष, रचना और बलिदान की आवश्यकता है।
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