*वाराणसी:* विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर में विश्वनाथ गली के दुकानदारों के धरने के बाद राज्यमंत्री डॉ. निलकंठ तिवारी ने मध्यस्थता कर मंदिर प्रशासन व विश्वनाथ गली व्यवसायिक समिति के पदाधिकारियों में से तीन पदाधिकारियों को शामिल करने का पत्र मंदिर के एसडीएम विनोद सिंह ने दिया था। पत्र मिलने के कुछ घंटों बाद ही विवाद हो गया। बुधवार को समन्वय समिति ने अपना नियुक्त पत्र वापस कर दिया।
विश्वनाथ गली व्यवसायिक समिति का आरोप था कि राज्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बैठक के दौरान कॉरिडोर के प्रभावित दुकानदारों की समस्याओं के निराकरण के लिये व्यवसायिक समिति तथा काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के मध्य समन्वय समिति के गठन की घोषणा की थी। इसके अनुक्रम में विश्वनाथगली व्यवसायिक समिति के अध्यक्ष लल्लन मिश्रा, महामंत्री सोनालाल सेठ तथा नवीन गिरी को समन्वय समिति का सदस्य बनाया गया।
आरोप है कि समिति के गठन के 24 घंटे भी नहीं बीते कि काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन द्वारा समिति के मंशा के विपरीत बिना किसी मशवरे के काम किया गया। प्रशासन के वादाखिलाफी तथा समिति के मंशा के विपरीत काम किए जाने के कारण विश्वनाथगली व्यवसायिक समिति ने विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट विनोद सिंह से समन्वय समिति ने स्पष्ट रूप से असहमति जता दी।
समिति में शामिल रहे लोगों का कहना है कि विश्वनाथ गली व्यवसायिक समिति का अब समन्वय समिति से कोई लेना देना नहीं है। विश्वनाथ गली व्यावसायिक समिति ने एक प्रेस नोट भेज कर स्पष्ट किया है कि किसी भी दशा में व्यापारियों के हित के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।

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