April 16, 2026

*बदलते काशी के बाद भी यहां के लोगों की आत्मीयता जितनी कहीं और नहीं-डॉ.राकेश*

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वाराणसी : भारतीय सभ्यता, संस्कृति और संवृद्धि को विदेशों में रह रहे भारतीयों ने निरन्तर प्रचार-प्रसार किया है तथा अन्य देशों के लिए भी आकर्षण का विषय बनाया है। ये भारतीय उन देशों की अर्थव्यवस्था के अभिन्न अंग बन चुके हैं। वहाँ की राजनीति तथा सरकार में भी प्रभावी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। इन भारतीय मूल के लोगों का अपने पूर्वजों की भूमि से निरंतर लगाव बना हुआ है । कुछ ऐसे भी भारतीय हैं जो उच्च शिक्षा के लिए वहाँ गये तथा वहां की नागरिकता हासिल कर वहीं बस गए है। ऐसे ही एक चिकित्सक हैं डॉ. राकेश श्रीवास्तव जिन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से चिकित्सा के क्षेत्र में एम.डी. की पढ़ाई पूरी कर उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए और वहीं के होकर रह गये। परन्तु उनका अपने देश की मिट्टी से लगाव कम न हुआ। प्रवासी सम्मेलन में शिरकत करने आये डॉ. राकेश पहड़िया स्थित काशी मेडिकेयर में डॉ.एम.के.श्रीवास्तव के मेहमान ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वाह काशी तेरे अनेक रूप जैसा सुना देखा था उससे कई गुना बदल गई काशी। डॉ. राकेश ने कहा कि 2013 में पुरातन छात्र एल्युमिनी के दौरान आया था। उस समय के काशी और अब की काशी में बहुत बदलाव आया है। डॉ. राकेश ने कहा कि एअरपोर्ट से अपने गंतब्य स्थल तक पंहुचने में बहुत ही कम समय लगा और पूरी काशी लाइट से जगमग कर रही थी। लगा ही नहीं कि हम काशी में आये हैं ऐसा लगा कि यूएस के किसी शहर में घूम रहे हैं। लेकिन यहाँ के लोगों में अब भी इतनी आत्मीयता देखने को मिली जो कहीं नहीं मिलती है। डॉ राकेश ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि कार्य करने का जो वातावरण यूएस में है यदि वही वातावरण यहाँ भी मिलने लगे तो लोग विदेशों में बसने की जगह अपने देश मे ही रहना ज्यादा पसंद करेंगे। अमरीका के ओयू मेडिकल सेंटर एडमोंड के चिकित्सा निदेशक डॉ राकेश श्रीवास्तव अपनी माँ माधुरी प्रसाद को भी साथ लेकर आये हैं। उनका कहना है कि माँ कि बहुत ही ख्वाहिश थी कि काशी दर्शन कर लूं इसलिये उनको साथ लेकर आया हूं। जमशेदपुर के मूल निवासी डॉ राकेश ने कहा कि यूएस में बीएचयू के पढ़े बहुत लोग रहते हैं जिन्हें सोशल मीडिया ने एक दूसरे से जोड़ने में बहुत ही अहम भूमिका अदा की है। डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि मेरी शादी अमेरिका मूल की लड़की के साथ हुई है जो हमारे तीज त्यौहार का बहुत ध्यान रखती हैं।