May 27, 2026

अवैध खनन से माफियाओं की बल्ले-बल्ले हाईटेंशन लाइन के नीचे हुआ अवैध खनन दे रहा हादसे को दावत- अमित कुमार प्रजापति

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👈अवैध खनन से माफियाओं की बल्ले-बल्ले हाईटेंशन लाइन के नीचे हुआ अवैध खनन दे रहा हादसे को दावत🔅

 

 

मानक से अधिक गहराई पर हो रहा खनन जिम्मेदारों ने आंखों में बांध रखी पट्टियां 👈

 

👉 अवैध खनन का वायरल वीडियो नें जिम्मेदारों की खोली पोल

 

पूर्व जिलाधिकारी आन्ञनेय सिंह ने दूधी कगार में हो रहे अवैध खनन पर की थी कड़ी कार्रवाई

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*फतेहपुर अवैध खनन पर लगाम लगाने में खनन विभाग नाकाम परिवहन विभाग बना मूक दर्शक जगह जगह अवैध खनन के बड़े-बड़े खनन स्थल बारिश में लोगों को पेश करेंगे चुनौती बड़ी दुर्घटना की आशंका मानक के विपरीत खनन जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली जगजाहिर आखिर कौन करे कार्रवाई चढ़ावे के दम पर ओवरलोड गाड़ियां दिनभर भर्ती फर्राटा जिम्मेदारों ने झाड़ा पल्ला काली कमाई का जरिया बना अवैध खनन एनजीटी के मानक, नियम खनन माफियाओं के आगे बौनें साबित हो रहे हैं। पीएनसी के नाम पर अवैध खनन माफिया हावी। बताते चलें कि एनजीटी के मानक चकरोड, गहराई,हाईटेंशन लाइन, वन विभाग की एनओसी के मानकों को दरकिनार कर अवैध खनन फल फूल रहा है। जो काली कमाई का स्रोत बनी हुई है। जानकारी के अनुसार बताते चलें कि गांव के ही तथाकथित लोगों की मिलीभगत से मन भर गैर जनपद से आए खनन माफिया द्वारा लगातार कई जगहों में तालाब रूपी स्वरूप खनन स्थलों को दे दिया गया है जो भविष्य में बड़े हादसों को दावत दे सकते हैं इन सभी मामलों से अनभिज्ञ खनन विभाग व परिवहन विभाग के साथ स्थानीय प्रशासन आंख मूंदकर दिनभर नेशनल हाईवे से फर्राटा भरते है। बुधवार को अवैध खनन का वायरल हुए वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है किस तरह पर्यावरण को क्षति पहुंचाते हुए अवैध खनन किया जा रहा है जेसीबी द्वारा जहां जंगल को साफ किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर बूम मशीन से खनन कारोबार संचालित किया जा रहा है। आपको बताते चलें कि पूर्व के गत वर्ष में अवैध खनन की सूचना पर जांच करवाते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी आन्ञनेय सिंह ने पीएनसी कंपनी के ऊपर कड़ी कार्रवाई कर नजीर पेश की थी। क्या अवैध खनन के कारोबार में संलिप्त लोगों की जांच व खनन स्थल की जांच करते हुए जिला प्रशासन द्वारा कड़ी कार्रवाई होगी नवांगतुक जिलाधिकारी से लोगों को अवैध खनन पर कार्रवाई की आस कल्यानपुर थाना क्षेत्र के मौहार गाँव का मामला*