*घटना की सूचना देने वाले व्यक्ति को दरोगा ने भेजा था जेल*
वाराणसी। जब कहीं से न्याय नहीं मिला तो सोमवार को पूर्वाहन पीड़ित की मां एसएसपी अमित कुमार पाठक के दरबार में पहुंच कर अपनी फरियाद सुनाई। एसएसपी के प्रतिनिधि के तौर पर एसपी प्रोटोकोल ने पीड़ित की फरियाद सुनने के बाद पीड़ित महिला को आश्वस्त किया कि इस मामले की जांच करा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि बीते
माह 11 जून की देर रात तेलियाबाग चौराहे के समीप मंडी व्यापारी व उनके पुत्र बाबू मौर्या के साथ कुछ मनबढ़ युवकों ने मारपीट किया था। मारपीट के दौरान मंडी व्यापारी का पुत्र बाबू मौर्या घायल हो गया था। इस दौरान चेतगंज थाने पर व्यापारियों की भीड़ जुटकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करने लगी थी। इस मामले में तेलियाबाग चौकी प्रभारी आदित्य सिंह कुछ फुटेज और वीडियो निकाल कर मिलान किये तो वीडियो में मारपीट करने वाले मुख्य रूप से पुलिस लाइन स्थित महिला पुलिसकर्मी का पुत्र भावेश उपाध्याय व उसके कुछ मित्र निकले। बड़ी बात तो यह है कि चौकी प्रभारी तेलियाबाग आदित्य सिंह ने सीसीटीवी फुटेज जैसे साक्ष्य को दरकिनार करते हुए घटना की सूचना देने वाले युवक पुनीत यादव उर्फ भोलू को 11 जून की सुबह घर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।इस मामले में जब घरवालो ने पुलिस अपराध का कारण पूछा तो चौकी प्रभारी आदित्य सिंह झूठ बोलते हुए बताया कि आपके लड़के पर एनबीडब्ल्यू जारी हुआ है। जबकि ऐसा कोई प्रकरण नहीं था। मुख्य आरोपी महिला पुलिसकर्मी का पुत्र भावेश उपाध्याय व उसके कुछ मित्र थे। पुलिस द्वारा बिना जांच किए बेगुनाह व्यक्ति पर मुकदमा संख्या 93/20 धारा 147,323 ,325 504 व 307 में दर्ज कर बिना विवेचना किए जेल भेज दिया जाता हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि मुकदमा दर्ज करने के बाद चौकी प्रभारी आदित्य सिंह पुनीत यादव की मां को फोन करके चौकी पर बुलाकर कहते हैं अपने बेटे से कहो कि सरकारी गवाह बन जाए मैं उसको जेल नहीं जाने दूंगा। पीड़ित की मां ऐसा करने से मना कर देती है।चौकी प्रभारी की बात नहीं बनी तो बिना विवेचना कीये पुनीत यादव उर्फ भोलू को जेल भेज देते हैं। वही 33 दिन जेल में रहने के बाद युवक जब बाहर आता है तो पुलिस धारा 307 खारिज कर देती है। वहीं पुलिस के गिरफ्त से मुख्य अभियुक्त भावेश उपाध्याय भी दूर रहता है। मिली जानकारी के अनुसार भावेश की माता पुलिस विभाग में तैनात है। दरोगा आदित्य सिंह भावेश उपाध्याय को बचाने के चक्कर में धारा 307 खारिज कर भावेश उपाध्याय को जेल जाने से बचा लिये वही जो इस लड़ाई में शामिल नहीं था उसको जेल काटना पड़ा।
*पीड़ित की मां ने दरोगा आदित्य सिंह पर लगाया आरोप*
जब चोट गंभीर नहीं लगी थी तो 307 जैसी धारा में मुकदमा दर्ज करने का कारण क्या था
मुकदमा दर्ज करने के बाद बिना विवेचना किए निर्दोष को क्यों जेल भेजा गया
मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किए बिना धारा 307 क्यो खारिज किया गया
पुलिस के पास प्राप्त फुटेज के आधार पर पुनीत यादव उस लड़ाई में शामिल नहीं था तो क्यो जेल भेजा गया
मुकदमा दर्ज भी हो जाता है तो चौकी पर बुलाकर बेवजह बात करने का क्या मतलब
यदि दोषी को पुलिस सजा नहीं देगी तो निर्दोष को जेल भेज कर पुलिस को क्या मिला
यदि मुख्य आरोपी महिला पुलिसकर्मी का पुत्र नहीं होता तो क्या पुलिस इस धारा को खारिज कर देती या फिर गिरफ्तारी करने में इतना देर लगाती ।

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