पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक नहीं बल्कि सरकार की मंशा के अनुरूप योजना की क्रियान्विति हुई।
आज तक न्यूज चैनल के स्ट्रिंग ऑपरेशन में खुलासे के बाद कांग्रेस को आत्म मंथन करने की जरुरत।
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12 जनवरी को देश के प्रमुख न्यूज चैनल आज तक पर ऑपरेशन सुरक्षा के नाम से प्रसारित स्ट्रिंग में बताया गया कि 5 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा में चूक नहीं बल्कि राज्य सरकार की योजना के मुताबिक क्रियान्विति हुई थी। पहले योजनाबद्ध तरीके से फिरोजपुर की रैली में लोगों को आने से रोका, ताकि प्रधानमंत्री की सभा में कुर्सियां खाली नजर आए और फिर फिरोजपुर के फ्लाई ओवर पर काफिले को रोक देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा को खतरे में डाला गया। पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का कहना है कि चुनावी रैली में कुर्सियां खाली थी, इसलिए प्रधानमंत्री फ्लाई ओवर से ही वापस लौट गए। लेकिन अब पंजाब सरकार के पुलिस अधिकारी ही कह रहे है कि रैली में जाने वालों को जगह जगह रोक दिया गया। इसकी जानकारी सरकार में बैठे बड़े लोगों को थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई। 5 जनवरी को जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने बीच सड़क पर आकर प्रधानमंत्री के काफिले का रास्ता रोका, तब भी बड़े लोगों को पूरी जानकारी थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों को हटाने के कोई निर्देश नहीं मिले। पुलिस चाहती तो बल पूर्वक प्रदर्शनकारियों को हटा सकती थी। आज तक के स्टिं्रग ऑपरेशन में पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की तुलना उपद्रवियों से की है। पुलिस अधिकारियों के बयानों से जाहिर है कि 5 जनवरी को फिरोजपुर के फ्लाई ओवर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जान को खतरा था। इसका आभास मोदी को उसी समय लग गया था, इालिए बठिंडा एयरपोर्ट पर मोदी ने पंजाब पुलिस के अधिकारियों से कहा था, सीएम चन्नी को कहनाकि मैं जिंदा लौट आया हंू। पीएम मोदी की इस टिप्पणी से भी मामले की गंभीरता का पता चलता है। स्टिं्रग ऑपरेशन से पंजाब सरकार की नीयत का खुलासा हो गया है। सब जानते हैं कि पंजाब में चन्नी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार चल रही है। ऐसे में अब कांग्रेस को आत्म मंथन करने की जरुरत है। राहुल गांधी बार बार कहते हैं कि कांग्रेस प्यार मोहब्बत की राजनीति करती है, लेकिन अब राहुल गांधी को बताना चाहिए कि कांग्रेस कौन सी राजनीति कररही है। क्या प्रधानमंत्री के जीवन को खतरे में डालना प्यार मोहब्बत की राजनीति है? नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद ऐसा कोई काम नहीं किया जिसके कारण गांधी परिवार के किसी सदस्य की जान को खतरा हो। प्रधानमंत्री को मिलने वाली एसपीजी की सुरक्षा वापस ली तो हाथों हाथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की सुरक्षा गांधी परिवार को उपलब्ध करवाई। इसमें भी उन्हीं अधिकारियों को रखा जो एसपीजी में काम कर चुके हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की पुत्री और राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी से दिल्ली का बंगला इसीलिए खाली करवाया क्योंकि प्रियंका गांधी सांसद नहीं है। यदि सांसद होती तो राहुल गांधी की तरह बड़े सरकार बंगले में आराम से रह सकती थी। सोनिया गांधी के पास आज भी वहीं 10 जनपथ वाला किलेनुमा बंगला है। जो यूपीए सरकार के समय आवंटित हुआ था। सवाल उठता है कि जब गांधी परिवार का इतना ख्याल रखा जा रहा है, तब कांग्रेस शासित पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को जानबूझकर खतरे में क्यों डाला गया। कांग्रेस को भी पता है कि इन दिनों पंजाब में कौन सी शक्तियां सक्रिय हैं। पाकिस्तान की घुसपैठ पंजाब में लगातार बढ़ रही है। पंजाब के हालातों पर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह भी चेता चुके हैं। पंजाब कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के दोस्ताना संबंध जग जाहिर है। पंजाब के हालात न बिगड़े, इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस की भी है। ऐसा न हो कि 1980 के दशक की तरह पंजाब के हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएं।





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