सियाराम मिश्रा
नई दिल्ली ।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरों के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को अंतरिम राहत देते हुए अगले छह दिन तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है । मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी ।
इस मामले को सीबीआई के दो उच्च अधिकारियों के बीच की लड़ाई के तौर पर देखा जा
रहा है । श्री अस्थाना ने सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ दायर प्राथमिकी को रद्द करने के लिए मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेमन और न्यायाधीश वीके राव के समक्ष याचिका दायर की थी । सीबीआई ने 15 अक्टूबर को श्री अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी । श्री अस्थाना पर आरोप है कि व्यापारी सतीश सना ने गिरफ्तारी से बचने के लिए एक बिचौलिए के माध्मय से उन्हें पांच करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी । श्री अस्थाना ने कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच की है जिनमें भगोड़े व्यापारी विजय माल्या के बैंक ऋण का घोटाला और अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाला शामिल है ।
सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच जारी जंग सार्वजनिक होने के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है । सीबीआई ने जांच एजेंसी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ रिश्वत लेने के मामले में एफआईआर दर्ज की है । आलोक वर्मा की ओर से सरकार को एक पत्र भेजा गया है , जिसमें राकेश अस्थाना के सस्पेंशन की बात कहते हुए उन्हें नैतिक पतन का एक स्त्रोत बताया गया था । देश के शीर्ष जांच एजेंसी में दो आला अधिकारियों के मध्य जारी कलह की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दखल देना पड़ा है । घटना पर पीएमओ के चिंतित होने के बाद दोनों अफसरों को समन भी जारी हुआ है , जिसके बाद सीबीआई चीफ आलोक वर्मा सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से
भी मिले ।

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