*सुप्रीमकोर्ट/उत्तरप्रदेश/ चित्रकूट जेल में पिछले साल हुए एनकाउंटर का मामला*
सुप्रीमकोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की इंक्वायरी रिपोर्ट कोर्ट और याचिकाकर्ता को दो हफ्ते मे देने का आदेश यूपी सरकार को दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि पुलिस के क्रॉस फायर में तीन बंदियों की मौत हुई। जिसकीं जांच भी यूपी सरकार ने कराई।
उन्होने याचिकाकर्ता से कहा कि आप इस मामले पर प्रोटेस्ट पेटिशन फ़ाइल कर सकते है लेकिन वो भी तब जब आप थर्ड पार्टी न हो।
इसपर याचिकाकर्ता एडवोकेट अनूप प्रकाश अवस्थी की ओर से पेश वकील ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री का विधानसभा में एनकाउंटर को लेकर बयान देने का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की हिंसा की नीति रोकी जानी चाहिए।उन्होंने ने कहा कि उस न्यायिक जांच में कई तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया गया।जिसमे उन तीनों की मौत हुई है। वह फर्जी एंकाउंटर था। इसलिए स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
वही यूपी सरकार ओर से पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले में हुई जांच में यह साफ है कि जिनका एंकाउंटर चित्रकूट में हुआ वह अपराधी थे और उनपर कई आपराधिक मामले पहले से ही चल रहे थे।
*सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर नवंबर के आखिरी हफ्ते में अगली सुनवाई करेगा।*
दरअसल पिछले साल चित्रकूट जेल में शार्प शूटरअंशु दीक्षित ने गैंगवार में कुख्यात बदमाश मुकीम काला और पूर्वांचल के अपराधी मेराज अहमद को 9MM की पिस्टल से हत्या कर दी थी। उस दौरान उसने पांच बंदियों को बंधक भी बना लिया था।
उसके बाद मौके पर पहुची पुलिस फोर्स पर अंशु दीक्षित ने फायरिंग कर दी। पुलिस ने जवाबी हमले मे अंशु दीक्षित को मार गिराया था।





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