सीरियल ब्लास्ट आरोपी वलीउल्लाह वाद वापसी में कार्यवाही की मांग
अमिताभ ठाकुर तथा डॉ नूतन ठाकुर ने पिछले दिनों फांसी की सजा पाए 2006 वाराणसी सीरियल ब्लास्ट के मुख्य आरोपी वलीउल्लाह के मुक़दमा वापसी प्रकरण के दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य को भेजे अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में वलीउल्लाह व शमीम पर से गुपचुप तरीके से मुकदमा वापसी की कार्यवाही शुरू की थी तथा तत्कालीन विशेष सचिव न्याय विभाग राजेंद्र कुमार ने डीएम वाराणसी को पत्र लिख कर वाद वापसी के संबंध में जनहित के दृष्टिगत मंतव्य सहित 13 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी. तत्कालीन डीएम सौरभ बाबू पर इस हेतु अनुचित दवाब बनाये जाने की बातें भी आई थीं.
अमिताभ और नूतन ने कहा कि पूरे राष्ट्र की सुरक्षा तथा संरक्षा से जुड़े इतना गंभीर आतंकवादी केस में वाद वापसी की कार्यवाही शुरू किया जाना अत्यंत गंभीर एवं जघन्य कार्य था, जो प्रशासनिक कदाचार एवं संभावित आपराधिक कृत्य है.
अतः उन्होंने वलीउल्लाह तथा शमीम के मुक़दमा वापसी विषयक मामले की जाँच कराते हुए नियमानुसार दोष निर्धारण किये जाने की मांग की है
संलग्न- पत्र
डॉ नूतन ठाकुर
# 9415534525
सेवा में,
श्री योगी आदित्यनाथ,
मुख्य मंत्री,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ
विषय- 2006 वाराणसी सीरियल ब्लास्ट के मुख्य आरोपी वलीउल्लाह के मुक़दमा वापसी प्रकरण के दोषियों पर कार्यवाही विषयक
महोदय,
कृपया अनुरोध है कि प्राप्त जानकारी के अनुसार संकटमोचन व कैंट रेलवे स्टेशन, वाराणसी पर दिनांक 07/06/2006 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट के आरोपी वलीउल्लाह व शमीम पर से प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में गुपचुप तरीके से मुकदमा वापसी की कार्यवाही शुरू की थी, जिसके क्रम में प्रदेश सरकार के तत्कालीन विशेष सचिव न्याय विभाग श्री राजेंद्र कुमार की ओर से जिला प्रशासन को एक पत्र भी भेजा गया था. जिलाधिकारी वाराणसी को भेजे गए पत्र में विशेष सचिव ने राज्य बनाम वली उल्लाह/ शमीम आदि के अभियोग वापसी के बाबत 13 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी. इतना ही नहीं, उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी श्री सौरभ बाबू पर इस हेतु अनुचित दवाब भी बनाये जाने की बातें सामने आई हैं. मांगीं गयी सूचना में वाद संख्या/मुकदमा अपराध संख्या, अपराध की धाराएं, न्यायालय का नाम जहां प्रकरण निलंबित है, अभियुक्तगण के नाम जिनके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया गया है, वाद की प्रथम सूचना रिपोर्ट/आरोप पत्र की स्पष्ट व पठनीय प्रति, वादी पक्ष की चोटों का विवरण, विवेचना के दौरान बरामदगी का विवरण, न्यायालय में मुकदमे की अद्यतन स्थिति, यदि क्रास केस हो तो उसका विवरण, केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्य का परीक्षण अभियोजन अधिकारी से कराकर साक्ष्य का विश्लेषण करते हुए अभियोजन की सफलता एवं दुर्बलता के बारे में पूर्ण विवरण, वाद वापसी के संबंध में संबंधित अभियोजन अधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक का स्पष्ट मत, वाद वापसी के संबंध में जनहित के दृष्टिगत स्पष्ट मत आदि सम्मिलित थे.
वलीउल्लाह और शमीम वर्ष 2007 में 6 मार्च को संकट मोचन मंदिर व कैंट रेलवे स्टेशन पर शाम को हुए बम विस्फोट, जिसमें डेढ़ दर्जन से अधिक लोग मारे गए थे, के प्रमुख आरोपी थे. विगत दिनों गाजियाबाद की एक अदालत ने इसी वलीउल्लाह को मृत्युदंड की सजा सुनाई है.
इन तथ्यों से स्पष्ट है कि एक इतने गंभीर, जघन्य एवं खतरनाक केस, जो पूरे राष्ट्र की सुरक्षा तथा संरक्षा से जुड़ा हुआ था और जिसमे सीधे-सीधे अत्यंत गंभीर आतंकवादी गतिविधियाँ की गयी थी, जिसमे दर्जनों लोग मारे गए थे तथा पूरे देश में आतंक फ़ैल गया था, में भी कुछ सरकारी कर्मी अपने समस्त संवैधानिक एवं वैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी तरह भुला कर इस प्रकार के आतंकवादियों की मदद एवं सहायता कर रहे थे और उनके मुकदमे वापस कराये जाने के प्रयास में लगे थे.
यह कृत्य स्वयं में अत्यंत गंभीर एवं जघन्य है, जो किसी भी प्रकार से क्षम्य नहीं है. सरकारी कर्मियों द्वारा एक आतंकी के प्रति इस प्रकार की सहानुभूति तथा उनके मुकदमे वापस लेने का प्रयास एक गंभीर कदाचार एवं संभावित आपराधिक कृत्य है.
उक्त तथ्यों के दृष्टिगत वलीउल्लाह तथा शमीम के मुक़दमा वापसी विषयक मामले की जाँच कराएँ तथा यदि किसी भी शासकीय कर्मी की भूमिका अनुचित एवं अवांछनीय पायी जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर वैधानिक एवं प्रशासनिक कार्यवाही किये जाने की कृपा करें.
भवदीय,
पत्र संख्या- NT/Complaint/27/2022
दिनांक- 07/06/2022
(अमिताभ ठाकुर) (डॉ नूतन ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमतीनगर, लखनऊ
# 094155-34525
प्रतिलिपि- मुख्य सचिव, एसीएस होम, प्रमुख सचिव न्याय विभाग, डीजीपी सहित समस्त संबंधित अफसरों को कृपया आवश्यक कार्यवाही हेतु

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