नई दिल्ली । सीबीआई में दो शीर्ष अधिकारियों की शक्तियां छीनने के विवाद को लेकर चल रही अदालती लड़ाई में काग्रेस भी कूद गई है । वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को इस मसले पर.सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की , जिसमें उन्होंने उच्चाधिकार समिति की अनुमति के बीना सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की सांविधानिक शक्तियां छीनकर उन्हें अवकाश पर भेजने को अवैध और मनमाना बताया है ।
खड़गे ने अपनी याचिका वर्मा की तरफ से खुद को हटाए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका के बीच में दी और शीर्ष अदालत से एक साथ दोनों पर सुनवाई करने की गुहार लगाई है । खड़गे की याचिका इसलिए भी अहम है क्योंकि वह सीबीआई निदेशक को चुनने वाली तीन सदस्यीय उच्चाधिकार चयन समिति में प्रधानमंत्री व चीफ जस्टिस के साथ नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मौजूद थे । खड़गे ने याचिका में कहा कि इस मामले में एक पक्ष होने के नाते वह कोर्ट का ध
यान सीबीआई निदेशक की स्वतंत्र कार्यप्रणाली में राजनीतिक हस्तक्षेप की तरफ दिला रहे हैं । उन्होंने कहा कि दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट की धारा-4 और विनीतनारायण मामले में दिए शीर्ष अदालत के निर्णय में सीबीआई निदेशक का कार्यकाल संरक्षित किया गया है । यहां तक कि बिना उच्चाधिकार समिति की सहमति के निदेशक को स्थानांतरित भी नहीं किया जा सकता है । खड़गे ने कोर्ट से कार्मिक विभाग और केंद्रीय सतर्कता आयोग के 23 अक्टूबर के निर्णयों को दरकिनार करने की गुहार लगाई है ।

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