*”सिर्फ आई कार्ड चेक करके पता नही किया जा सकता कौन असली है कौन नकली*”
*अटल बिहारी शर्मा*- जब से अतीक अहमद की और असरफ की शूटरों ने गोली मारकर हत्या की तब से पत्रकारिता जगत में काम करने वाले पत्रकार साथियों को कुछ अलग ही नज़रों से देखा जाने लगा है कारण शूटर पत्रकार बन कर आये थे।
आपने देखा होगा कि जैसे अतीक अहमद असरफ की शूटरों ने हत्या कि और ख़बर चला कि पत्रकार के भेष में आये तीन लड़कों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करके माफिया अतीक अहमद तथा उसके भाई असरफ को मौत के घाट उतार दिया।
तत्काल लखनऊ में कालीदास मार्ग पर मीडिया प्रतिबंधित कर दिया गया।
और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री के बंगलों पर भी मीडिया वर्जित कर दी गई।
साथ ही अब कोई भी शासन प्रशासन से जुड़ी ख़बरें कवरेज करने से पहले पुलिस को आई कार्ड दिखाना पड़ेगा।
और ये अच्छी बात भी है।
लेकिन आई कार्ड से फर्जी कौन है ये पता नहीं लगाया जा सकता है क्योंकि जिन शूटरों ने पत्रकार का चोला पहना था उन के पास भी आई कार्ड तथा माइक था।
असली और नक़ली का पहचान पत्रकार के हाव भाव सादगी बातचीत करने के तरीके से तथा उनके किये कार्य से पहचाना जा सकता है।
प्रशासन को यदि कोई संदिग्ध दिखता है और शक होता है कि ये फर्जी पत्रकार है तो उस व्यक्ति से आई कार्ड के साथ- साथ उस पत्रकार के किये गये कवरेज टी वी चैनल पर प्रसारित ख़बर य अखबार में प्रकाशित कटिंग य डिजिटल मीडिया पर पत्रकारिता करनेवाले पत्रकारों के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित ख़बर जरूर देखें।
इस आसान तरीके से पता लगाया जा सकता है।
डिग्री रजिस्ट्रेशन आई कार्ड देख कर नही बल्कि पत्रकारिता देख कर पता लगाया जा सकता है।
जिससे जो हकीकत में पत्रकारिता करके देश समाज के हित के लिए टी वी चैनल अखबार डिजिटल मीडिया के प्लेटफार्म पर कड़ी मेहनत करके पत्रकारिकता करतें हैं उनको शक की नजरों से न देखा जाये।
*आवाज जन-जन की अपराध भ्रष्टाचार के खिलाफ*।
स्वतंत्र पत्रकार अटल बिहारी शर्मा लखनऊ

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