वाराणसी। काशी जिसे सामाजिक उत्सवों की नगरी भी कहते हैं, यहां के सामाजिक जीवन की अद्भुत विशेषता है। समन्वित जीवन शैली के साथ जीवन को जीवंत बनाने के अद्भुत प्रयास ,इन्ही प्रयासों में से एक है, भेलुपूर के जिवधीपुर क्षेत्र में 1972 से प्रारंभ की गई ” होली बरात”। सामाजिक सौहार्द का इतना अच्छा उदाहरण कि जब बरात हाथी घोड़े व गाजे बाजे के साथ मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र बजरडीहा में प्रवेश करती तो यहां मुस्लिम समुदाय द्वारा पुष्प व इत्र से पूरे बरात का सम्मान किया जाता है।
आज इस आयोजन के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं और दूसरी पीढी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पूरे होली बरात के आयोजन की जिम्मेदारी उठा ली है। इस बरात का प्रारम्भ जिवधीपुर क्षेत्र के निवासी मेवा सरदार द्वारा किया गया जिसमें स्वर्गीय राजेन्द्र उपाध्याय स्वर्गीय अन्तदेव , स्वर्गीय शीतल चौहान, बाबूलाल प्रजापति, सहित अन्य गणमान्य लोगों ने अपने सामाजिक योगदानों द्वारा मजबूती प्रदान की।
जीऊत यादव, चन्दन चौहान, ज्वाला चौहान, प्रकाश वर्मा ,शंकर यादव, सिंकू पाण्डेय, अनूप जायसवाल, डा मनोज प्रजापति सहित अन्य युवा इस बारात के हर पहलू को संयोजित करने हेतु क्रियाशील है। अपने सामाजिक जीवन के दायित्वों में यह बरात मेरे ह्रदय के बहुत करीब रही क्योंकि बिना किसी बडे आर्थिक सहयोग के भी यह बारात पिछले 50 वर्षों से सामाजिक सद्भाव का संदेश दे रही है। मैं 2003 से 2007 तक इस बरात कमेटी का अध्यक्ष रह। उस दौरान के अनेक सामाजिक अनुभव मुझे समाज की शक्ति का अहसास कराते है। प्रसिद्ध समाज वैज्ञानिक दुर्खीम ने कहा था, समाज ही देवता है तो यह कथन यहां के निवासियों हेतु शत प्रतिशत सत्य प्रतीत होती है।
यह बरात जिवधीपुर भरोटीया से प्रारंभ होकर शंकुलधारा, किरहीया ,जिवधीपुर, बजरडीहां के मार्ग होते हुए देवपोखरी स्थित हनुमान मंदिर के प्रांगण में समाप्त होती है ,जिसमें करीब 1000-1200 लोग सम्मिलित होते हैं। पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न प्रकार की झांकिया व राम दरबार का आयोजन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। आज आवश्यकता है ऐसे सामाजिक आयोजनों को गति प्रदान करने की जिससे समाज में बढ रहे वैमनस्य को कम किया जा सके ।
– डॉक्टर सुनील मिश्र , समाज कार्य विभाग, महात्मा काशी विद्यापीठ, संरक्षक, होली बरात आयोजन समिति।

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