विद्युत अमेंडमेंड बिल सहित 06 सूत्री मांग के समर्थन में शुरू हुई है दो दिवसीय हड़ताल।
वाराणसी. केंद्र सरकार की जनविरोधी- कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ देश भर के 15 लाख बिजली कर्मचारी मंगलवार से दो दिवसीय हड़ताल पर चले गए। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि हड़ताल के दौरान वो बिजली आपूर्ति में कोई बाधा नहीं उतपन्न करेंगे लेकिन किसी तरह का फाल्ट दो दिन के बाद ही दूर होगा। इस सिलसिले में बनारस के भिखारीपुर स्थित पूर्वाचंल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर कर्मचारियों का जुटान हो गया है। वहीं दिन भर धरना-प्रदर्शन और सभा का दौर चलेगा।
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉइज एवं इंजीनियर्स (एन सी सी ओ ई ई ई) के आह्वान पर मंगलवार को देश भर में बिजली कर्मचारियों व अभियन्ताओं ने दो दिवसीय कार्य बहिष्कार प्रारम्भ कर दिया। इसके तहत प्रदेश के सभी जिला व परियोजना मुख्यालयों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। वाराणसी के भिखारीपुर स्थित पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर विरोध सभा आयोजित की गई है। इलेक्ट्रिसिटी अमेण्डमेन्ट बिल 2018, निजीकरण की केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में आज देश भर के लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारी व अभियन्ता कार्य बहिष्कार कर विरोध सभाएं कर रहे हैं। बिजली कर्मचारियों ने विरोध सभाओं के माध्यम से चेतावनी दी कि यदि केंद्र व राज्य सरकारों ने कर्मचारी व जन विरोधी नीतियां वापस न ली तो देश भर के बिजली कर्मचारी व अभियन्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे।
विरोध सभा में संघर्ष समिति ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने संसद में इलेक्ट्रिसिटी अमेण्डमेन्ट बिल 2018 को जबरिया पारित कराने की कोशिश की तो तमाम बिजली कर्मचारी व अभियन्ता बिना और कोई नोटिस दिये उसी समय लाईटनिंग हड़ताल पर चले जाएंगे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बताया कि मुख्य रूप से 06 मांगों को लेकर दो दिन की हड़ताल का निर्णय लिया गया है।
ये हैं मांगें
1- बिजली निगमों का एकीकरण कर उप्र राज्य विद्युत परिषद निगम लिमिटेड का पुर्नगठन
2-इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2018 को वापस लिया जाना व आगरा फ्रेंचाइजी तथा ग्रेटर नोएडा बिजली का निजीकरण निरस्त हो
3- वर्ष 2000 के बाद भर्ती सभी कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू किया जाय
4- सभी श्रेणी के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करना और संविदा व ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर संविदा कर्मियों को तेलंगाना सरकार के आदेश की तरह नियमित किया जाय
5- बिजली कर्मियों की वेतन विसंगतियों का द्विपक्षीय वार्ता द्वारा तत्काल समाधान किया जाय
6- सरकारी क्षेत्र के ताप बिजली घरों का नवीनीकरण, उच्चीकरण करना और निजी घरानों से मंहगी बिजली खरीदने के लिए सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों के बंद करने की नीति को वापस ली जाए
इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंड बिल 2018 एवं नेशनल टैरिफ पॉलिसी के अधिकांश प्राविधान जन विरोधी
संघर्ष समिति ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंड बिल 2018 एवं नेशनल टैरिफ पॉलिसी के अधिकांश प्राविधान जन विरोधी हैं लेकिन इनमें सबसे घातक विद्युत आपूर्ति को विद्युत वितरण से अलग कर निजी कंपनियों को विद्युत आपूर्ति के लाइसेंस देना है। राज्य सरकार विद्युत पारेषण व वितरण का नेटवर्क बनाएगी व इसका रखरखाव करेगी। नेटवर्क बनाने व रखरखाव करने पर राज्य सरकार अरबों रूपये खर्च करेगी और बिना एक भी पैसा खर्च किये इस नेटवर्क के जरिए बिजली आपूर्ति कर निजी कंपनियां भारी मुनाफा कमाएंगी। स्वाभाविक तौर पर पारेषण व वितरण के नेटवर्क का खर्च उपभोक्ता पर डाला जाएगा जबकि मुनाफा निजी कंपनियों की जेब में जाएगा। नई व्यवस्था में यूनिवर्सल सप्लाई आब्लीगेशन अर्थात सबको बिजली देने की बाध्यता केवल सरकारी कंपनी की होगी जब कि निजी कंपनियों को छूट होगी कि वे अपने मनमाफिक मुनाफा कमाने वाले औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं को ही बिजली दें और घाटे वाले ग्रामीण व घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन न दें। स्वाभाविक तौर पर इस प्रकार सरकारी आपूर्ति कंपनी घाटा उठाने वाली कंपनी बन कर रह जाएगी।
किसानों और आम उपभोक्ताओं को मिलेगी महंगी बिजली
इस संशोधन के बाद उत्तर प्रदेश में किसानों व आम उपभोक्ताओं को 10 रुपये प्रति यूनिट से कम पर बिजली नहीं मिलेगी। स्पष्टतया इतनी मंहगी दरों पर किसान बिजली नहीं खरीद पाएगा जिसका दुष्परिणाम खाद्यान्न के उत्पादन पर पड़ेगा और एक बार पुनः देश 1965 के पहले के खाद्यान्न आयात (पी एल 480) के युग में पहुंच जाएगा जो देश के लिए अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
नई नीति के तहत सब्सिडी व क्रास सब्सिडी शनैः शनैः तीन साल में समाप्त कर दी जाएगी
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