July 7, 2026

मजदूर कितना बेवस हैं

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कोरोना के कहर से रोजाना सैकड़ों की संख्या में मजदूर श्रमिकों द्वारा अपने शहर और गांव की तरफ तेजी पलायन कर रहे हैं। हालांकि सरकार द्वारा बसें और श्रमिक स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं लेकिन बावजूद इसके ये मजदूर हजारों किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करते चले जा रहे हैं बस एक उम्मीद पर कि अपने जगह पहुंचकर वो सुरक्षित और अपने जीवन को गुजर बसर करने लायक बना लेंगे। इन सब को लेकर लाचार और बेबस मजदूर हर वो काम करने से इन दिनों नहीं कतरा रहा है क्यूंकि शायद कहीं ना कहीं  अंदर उम्मीद की एक किरण भी बाकी है। ऐसा ही एक वाक्या सामने आया जब एक मजबूर पिता ने अपने बेटे  खातिर साइकिल की चोरी कर डाली और इतना ही नहीं अपनी बेबसी और जुर्म  क्षमा भी मांगी, पढ़िए ये रिपोर्ट :

रोजगार के लिए निकले इन लोगों को क्या पता था कि एक दिन कोरोना नामक ये कहर उनके लिए इतना भारी पड़ेगा और उनकी पटरी पर दौड़ती जिंदगी खाने एक दाने के लिए भी  तरस जाएगी और उनको अपने गांव की तरफ शहर को छोड़कर मुड़ना होगा। वापसी करना भी इनके लिए आसान नहीं है। सैकड़ों मील का लम्बा सफर ये पैदल ही तय कर रहे हैं। ना धूप की परवाह  और ना गर्मी का एहसास। इन्हीं में से एक श्रमिक ऐसा था जिसने अपने विकलांग बच्चे की खातिर एक साइकिल की चोरी की। और उस श्रमिक ने साईकिल के मालिक के लिए एक खत छोड़ा जिसमें उसने अपनी मज़बूरी और बेबसी की जिक्र भी किया, जिसे पढ़कर आपकी भी आँखें नम जरूर हो जाएंगी।

तो पढ़ा आपने किस तरह से उस श्रमिक ने अपने बेबसी को बताया है। कैसे अपने विकलांग बच्चे को बरेली तक ले जाने के लिए चोरी पर आमादा हो गया। सोचने वाली बात है कि आदमी जब पूरी तरह से हताश और लाचार  है तो वो ऐसी चीजों को करता है जो वो नहीं करना चाहता , मगर उसकी मज़बूरी उससे वो सब करवाने के लिए मजबूर कर देती है। जिसका उदाहरण आपके सामने है कि किस तरह से वो मजदूर अपने किये के लिए शर्मिंदा है और माफ़ी मांग रहा है।