कृष्ण मोहन उर्फ बग्गा
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जौनपुर 10 जनवरी (सत्यम् न्यूज़) मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि निराश्रित व बेसहारा पशुओ के लिये अस्थायी गोआश्रय स्थल की स्थापना व व्यवस्था एवं प्रबंधन व संचालन हेतु स्थानीय निकायो को एवं आश्रय स्थल पर भरण पोषण की व्यवस्था आदि सुविधा उपलब्ध कराये जाने के लिये ग्राम्य विकास विभाग व पंचायतीराज विभाग व नगर विकास विभाग को निर्देश दिये गये हैं। मुख्य विकास अधिकारी गौरव वर्मा द्वारा जनपद के समस्त ग्राम प्रधानो से आवाहन किया गया है कि कोई भी निराश्रित व बेसहारा पशुओ को अस्थायी आश्रय स्थल बनाकर उसमे रखने की व्यवस्था करवाए। कोई भी गोवंश खुली जगहो पर घूमता हुआ न पाया जाय, यदि पाया जाता है तो उसे नजदीक के अस्थायी गोआश्रय स्थल पर भेजवाया जाय। साथ ही मुनादी कराई जाय कि कोई भी ग्रामवासी अपने पशु खुले में न छोड़ें, उन्हे घेरकर अथवा बांधकर रखे। क्योंकि एक ओर इससे कृषको की फसल का नुकसान होता है वही इनसे दुर्घटनाएं की भी सम्भावना बनी रहती है, अगर इसके बावजूद भी लोग नही मानते तो शासनादेश संख्या 07/2018/2851/33-2-2018-25-जी/17 पंचायतीराज अनुभाग-2 लखनऊ, 02 अगस्त 2018 के अनुपालन मे दण्डित किया जायेगा। सांड, बैल, गाय, बछडा, घोड़ी, भैंस, बछेडी, बछेडा, पडिया, पड्वा, टट्टू, घोडा, गधा, खच्चर आदि पर रुपये 1000 अर्थदण्ड और रुपये 100 प्रतिदिन की दर से खुराकी, एक वर्ष तक के गाय के बछडे, बछिया या पडवा पर रुपया 500 का अर्थदण्ड और 50 रुपये खुराकी, बकरा, बकरी, बकरी का बच्चा, भेड, भेडी एवं उसका बच्चा, सुअर और उसके बच्चे पर रुपये 500 का अर्थदण्ड और 50 रु0 खुराकी वसूला जायेगा।
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