*नाम तो सुना ही होगा आदर्श थाना कैंट,बस मात्र नाम का आदर्श,यहाँ से पीड़ित होकर लौटते हैं,निराश*
बीते दिनों वाराणसी के पुलिस लाईन तिराहे समीप ,यशवंत सिंह नामक व्यक्ति अपनी पत्नि सरिता सिंह व अपने एक बच्चे के साथ शादी समारोह से घर लौट रहें थे।जब बस से उतर कर वह पुलिस लाइन तिराहा पार कर रहें थे ,कि तभी एक बिना नम्बर की आपाची आरटीआर से तीन लोग सवार होकर तेज रफ्तार के साथ आते हुए यशवंत सिंह को टक्कर मार दिये।टक्कर लगते ही यशवंत सिंह सड़क पर गिर गए।पीड़ित के मुताबिक़ तभी आपाचे सवार तीन युवकों मे से एक युवक ने यशवंत सिंह को थप्पड़ जड दिया।जब इसका विरोध पीड़ित की पत्नि ने किया. तो युवक ने पीड़ित की पत्नी सरिता सिंह को मां -बहन की गाली देते हुए.बाल खींचते हुए.सड़क पर ज़ोरदार धक्का दे दिया।जिससे महिला के बाएं हाथ की उंगली टुट गयी।और बाइक चला रहें युवक ने पीडित यशवंत सिंह के सर पर हेल्मेट से प्रहार कर दिया।जिससे यशवंत सिंह के सर में गहरी चोट लग गयी।ये सब देखकर जब आसपास के लोग जुटने लगें तो तीनों युवक आपाची बाइक छोड़कर मौके से फरार हो गए।
*कैंट एसओ विजय बहादुर सिंह ने पीडीत से कहा तुम्हारी औकात नही है,मुकदमा लड़ने की, कर लो समझौता*
वही मौजुद लोगों मे से किसी ने 100 नम्बर पर सूचना दे दिया।घटना स्थल पर पहुंची 100 नम्बर की पुलिस ने आपाचे आरटीआर को कैंट थाने ले गयी।थाने पर पहुंचे पीड़ित यशवंत सिंह ने जब घटना की पूरी जानकारी जब कैंट थाना प्रभारी विजया बहादूर सिंह को दिया तो ,कुछ समय पश्चात कैंट थाना प्रभारी ने दूसरे पक्ष के थाने पर आने की बात कहने लगें।और पीड़ित के उपर दुसरे पक्ष से समझौता करने का दबाव डालने लगें।पीड़ित ने जब समझौता करने से इंकार कर दिया,तो कैंट एसओ विजय बहादूर सिंह आग बबुला होते हुए।पीड़ित से कहने की मुकदमा लड़ने की, तुम्हारी औकात और हैसियत नही है।
*मुकदमा लिखा अज्ञात का और थाने से बाइक आपाचे आरटीआर हो गयी नदारद*
फिलहाल किसी तरह कैंट थाना प्रभारी ने पीड़ित का मुकदमा दर्ज कर लिया।पर मुकदमें में आपाचे सवार तीनों युवकों को अज्ञात दिखा दिया गया।अब सोचने वाली बात यह है ,कि जब दुसरा पक्ष भी थाने पर पहुंचा था,तो मुकदमा अज्ञात का कैसे दर्ज कर किया गया।थाना प्रभारी ने मुकदमा दर्ज भी कराया तो गोलमाल कराया।और सबसे बड़ी बात तो यह रही की जब अज्ञात का मुकदमा लिखा था ,तो जो आपाचे आरटीआर को 100 नम्बर की पुलिस कैंट थाने लेकर आई ,तो वो आपाचे आरटीआर बाइक थाने से गयी कहाँ।आखिर आपाचे बाइक ले कौन गया।
*ऐसा थाना और थाना प्रभारी होने से क्या फायदा ,जहां पीड़ित को अपने न्याय के लिए उच्च, अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर लगाना पड़े*
अन्त में जब पीड़ित को कैंट थाने से न्याय नही मिला तो ,पीड़ित ने थक हार कर आज एसएसपी कार्यालय पहुँच कर न्याय की गुहार लगायी।जहां से उन्ह जांच होगा का आश्वसन मिला।अब देखना ये होगा आखिर पीड़ित को न्याय मिलता कब है।ऐसा थाना और ऐसे थाना प्रभारी होने से क्या फायदा जहां पीड़ित को न्याय नही मिलता हो,और पीड़ित को अपने न्याय के लिए उच्च अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर लगाना पड़े।
साभार





More Stories
यूपी विद्युत नियामक आयोग ने 8 मई को बुलाई बड़ी बैठक –
यूपी में 4 मई को होने वाले निकाय चुनाव के मतदान से पहले भारत-नेपाल की सीमा को किया जाएगा सील-
सीआईएसएफ की परीक्षा में पकड़े गए दो मुन्ना भाई-