August 30, 2026

नफरत और हिंसा में डुबा कर धर्म में विश्वास रखने वाले युवाओं को कौन सी दिशा दी जा रही ?

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*नफरत और हिंसा में डुबा कर धर्म में विश्वास रखने वाले युवाओं को कौन सी दिशा दी जा रही..?*

 

*अनापशनाप बयानबाजी करके देश के संविधान और कानून दोनों को चुनौती दे रहें..?*

 

 

*ऐसे लोगो की मानसिकता पर विराम लगाना जरूरी..!!*

 

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हमारा देश आज भी एक लोकतंत्र देश है जहां धर्मनिरपेक्षता संवैधानिक अधिकार है किसी के खिलाफ जबर्दस्ती करने पर कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान है पर अगर यह प्रावधान है तो उन भड़काऊ प्रवक्ताओं पर कानूनी कार्रवाई होना चाहिए!

 

विडंबना यह है कि कुछ राजनीतिक दलों और इन असामाजिक तत्त्वों की मिलीभगत से ऐसे लोग गंभीर आरोपों से बच जाते हैं जो शर्मनाक बात है!

 

दूसरे धर्म के लोगों को मारने का संदेश देकर अपने धर्म का राष्ट्र बनाने की सोच रखना ही अपराध है पर आज यह खुले आम देखने को मिल रहा है!

 

आज कोई धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखता है तो उसे भी नकली देशभक्ति सिखाते हैं और एक विचार धारा को पालने पर मजबूर करते हैं जो संवैधानिक अधिकार का हनन है!

 

सवाल है कि इस तरह नफरत और हिंसा में डुबा कर धर्म में विश्वास रखने वाले युवाओं को कौन सी दिशा दी जा रही है?

 

क्या हमारी भावी पीढ़ियां अयोग्य और अक्षम होकर नफरत और हिंसा में जीने के लिए तैयार हो रही हैं?

 

हरिद्वार में धर्म संसद के कार्यक्रम में शामिल कुछ धर्म और समाज के ठेकेदारों द्वारा ऐसी खराब और अपमानजनक वार्ता की गई जिससे आज तूफान सा मच गया है! ऐसे लोगी की यह मानसिकता आने वाले समय मे क्या गुल खिला सकती हैं!

 

खुद को धर्मगुरु कहने वाले लोग अनापशनाप बयानबाजी करके देश के संविधान और कानून दोनों को चुनौती दे रहें है !ऐसे लोगो की मानसिकता पर विराम लगाना जरूरी हो गया हैं!

 

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