नौ हजार करोड़ के बैंक लोन घोटाले में फरार चल रहे शराब कारोबारी विजय माल्या ‘भगोड़ा’ आर्थिक अपराधी घोषित हो गया है। धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बने स्पेशल कोर्ट ने शनिवार को मुंबई में शराब कारोबारी विजय माल्या को भगोड़ा वित्तीय अपराधी घोषित कर दिया। इस कानून में जांच एजेंसियों को एफईओए के तहत दर्ज अपराधी की सारी संपत्तियां जब्त करने का अधिकार है। अब कर्नाटक, इंग्लैंड और अन्य जगहों की विजय माल्या से जुड़ी संपत्तियां ईडी कुर्क कर सकता है।
देश का पहला आर्थिक अपराधी बना माल्या
बता दें कि इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। 26 दिसंबर 2018 को कोर्ट ने फैसला 5 जनवरी तक के लिए सुरक्षित रखा था। जिसके बाद आज सुनवाई करते हुए विशेष पीएमएलए अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। इसी के साथ अब सरकार को विजय माल्या की संपत्ति जब्त करने का भी अधिकार मिल गया है। कोर्ट के इस फैसले के साथ ही विजय माल्या देश का पहला आर्थिक अपराधी बन चुका है जिसके खिलाफ नए भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018 के तहत केस चलेगा।
अर्जी खारिज
इसके साथ ही विशेष अदालत ने माल्या की उस अर्जी को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपील करने के लिए कुछ समय की मांग करते हुए अपने आदेश पर स्टे लगाने की मांग की थी।माल्या ने पहले प्रिवेंशन मनी लॉन्ड्र एक्ट (पीएमएलए) अदालत को बताया था कि वह भगोड़ा आर्थिक अपराधी नहीं है, उसने यह भी कहा था कि वह मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल नहीं है।
प्रत्यर्पण की रजामंदी
गौरतलब है कि विजय माल्या इस समय लंदन में है। लंदन की कोर्ट माल्या के प्रत्यर्पण के लिए रजामंदी दे चुकी है, लेकिन माल्या के पास फिलहाल इसके खिलाफ अपील करने के लिए जनवरी तक का वक्त है। माल्या इन दिनों ब्रिटेन में है। 62 वर्षीय कारोबारी पर मनी लांड्रिंग का भी आरोप है। लंदन की एक कोर्ट ने उसके भारत के समक्ष प्रत्यार्पण का आदेश भी दिया है

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