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Siyarammishra Varanasi◆
संपादक की कलम से
18 अक्टूबर 2018 , दिन गुरुवार
वाराणसी : शक्ति की आधिष्ठात्री देवी जगदंबिका की नौ दिनी पूजा-आराधना श्रृंखला शारदीय नवरात्र की अष्ठमीयुक्त नवमी पर बुधवार की शाम देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी उत्सव के रंगों में डूबी रही । रंग-बिरंगी बल्बों व झालरों की रोशनी से नहाई सड़कें और पंडालों में आस्था का सैलाब उमड़ता रहा । उत्साह का आलम यह कि शाम से पंडालों में धर्मानुरागियों व उत्सवप्रेमियों की लंबी कतार लगी तो रात के तीसरे पहर भी भीड़ से सड़कें स्त्री क्या पुरुष या बच्चों से नगर की सड़कें गुलजार रही । नगर हो या गांव उत्सवप्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करते रहे की कब सुबह होने लगा पता ही नहीं चला । कानफोड़ू ध्वनिविस्तारक यंत्रों पर गूंजते देवी गीतों पर श्रद्धालु झूमते-इठलाते रहे । रंग में भंग डालने वाले भी सक्रिय रहे जिन्हें जिलाप्रशासन व पुलिस के चौकस व्यवस्था के आगे एक न चली व रगें-हाथ पकड़ाते रहे ।
देवी के सामने शीश नवाते , प्रसाद का स्वाद लेते , अपने-अपने अंदाज में सुख-समृद्धि की कामना करते टहलान मारते रहे । पंडालों की मनोहर छटा से भाव विभोर होते तो श्रद्धावनत हो जयघोष में रम जाते । बच्चों के लिए यह सब एक कौतुहल भरा जहां रहा वहीं खिलौनों या खानपान के सामान पर उनका मचलना भी आकर्षक रहा ।
पूजा पंडालों में सुबह से ही मां दुर्गा की महाष्टमी पूजा का क्रम शुरू हुआ और हवन के धुएं युक्त सुगंध से गलियां-सड़कें गमगमा यहीं थी । कानों में गूजती सस्वर मंत्रों की स्रुति ( ध्वनि ) से संपूर्ण शिव जी की नगरी माँ मैं हो गया । माँ दुर्गा के साथ ही माँ लक्ष्मी , देवी सरस्वती , प्रथमपूज्य गनपति व कार्तिकेय की प्रतिमाओं का पूजन व अभिषेक किया गया । ढाक के डंकों से गूंजते पंडालों में धुनूचि नृत्य संग मां की आरती की गई । कुमारी पूजन के साथ ही खिचड़ी का महाभोग लगाकर भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया ।
बंगीय समाज के पंडालों में महाष्टमी पूजा के बाद भक्तजनों ने भगवती को अपराजिता की माला भेंट किया । महिलाओं व पुरुषों के साथ बच्चों ने मातारानी को द्वितीय पुष्पांजलि अर्पित किया । प्रतीक स्वरूप नारियल की बलि के साथ मां की जयकार से पंडालों को गुंजाया । भारत सेवाश्रम संघ सिगरा व अन्य पंडालों में 108 दीपों व कमल पुष्प के साथ महानिशा पूजा की गई । अष्टमी-नवमी तिथियों की संधि बेला में संधि पूजा की गई । पंडालों में अल्पना व रंगोली भी सजाई गई । लक्सा स्थित रामकृष्ण अद्वैत आश्रम में कुमारि पूजन का अनुष्ठान श्रद्धा के साथ संपादित हुआ ।

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