May 27, 2026

दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन में जश्न ए-चिरागां होगा – गिरीश जुयाल

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दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन में जश्न ए-चिरागां होगा= श्री गिरीश जुयाल

 

आओ अज्ञान के अंधेरे से इल्म से प्रकाश की ओर चलें चलो जलाएं दीप वहां जहां अभी भी अंधेरा है यह संदेश हमारे बुजुर्गों ओलियम पीरों और संतों का रहा है इसी के अंतर्गत मुस्लिम राष्ट्रीय मंच हजरत निजामुद्दीन दरगाह में दिवाली यानी

चिराग रोशन करने का कार्य करेगा जो निम्नलिखित है

 

 

(विशेष सूचना- अनिवार्यतः पूरा पढ़े)

“मुस्लिम राष्ट्रीय मंच”

=दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन में जश्न ए-चिरागां होगा=

*माननीय इंद्रेश जी रहेंगे उपस्थित*

 

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (गोसेवा प्रकोष्ठ) द्वारा भाईचारे और रोशनी का संदेश देने दीपावली के पावन अवसर पर प्रसिद्ध सूफ़ी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह,दिल्ली में जश्न-ए-चिरागां (दीपावली उत्सव) 719 चिराग रौशन कर मनाया जाएगा, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक माननीय इंद्रेश कुमार जी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे,

इस अवसर पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सभी पदाधिकारीगण, कार्यकर्ता अपने मित्रों परिवार सहित सादर आमंत्रित है।

 

कार्यक्रम

————

 

कार्यक्रम का नाम – जश्न-ए-चिरागां

दिनाँक – 22 अक्टूबर 2022, धनतेरस

समय- शाम 6:30

स्थान- हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह, दिल्ली

आयोजक- मुस्लिम राष्ट्रीय मंच(गोसेवा प्रकोष्ठ)

 

निवेदन

मोहम्मद फ़ैज़ ख़ान

राष्ट्रीय संयोजक – मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (गोसेवा प्रकोष्ठ)

फ़ोन- +917835814510,

+91 87450 25606,

+91 98910 17455,

+91 90139 05786

 

नोट- जिन सदस्यों को चिराग सजाने और तेल बाती लगाने की ज़िम्मेदारी दी जाएगी उन्हें शाम 4:30 बजे दरगाह पहुंचना होगा जो लोग ये ज़िम्मेदारी लेना चाहते है वो श्रीमती शालिनी अली राष्ट्रीय संयोजक- महिला प्रकोष्ठ (मुस्लिम राष्ट्रीय मंच) से अविलंब संपर्क करें।

 

विशेष ध्यानाकर्षण – यह सूचना अपने लोगों को व्यक्तिगत रूप से फ़ोन, मेसेज, व्हाट्सएप करके दें फेसबुक इत्यादि में सार्वजनिक पोस्ट ना करें।

 

(इनके हक़ में दुआ करें – इस बार चिराग़ रोशन जनाब बादशाह ख़ान पठान गुजरात (प्रदेश सहसंयोजक – गोसेवा प्रकोष्ठ) की जानिब से होगा जिन्होंने हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की बारगाह में चिराग रोशन के लिए 11000/- रु. हदिया नज़र किया है, अल्लाह इनके कारोबार में बरक़त अता फरमाए, आमीन)