June 22, 2026

ठेकेदारी प्रथा को लेकर सुगबुगाहट तेज ठेकेदार व अधिकारी के बीच सेटिंग- अमित कुमार प्रजापति

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ठेकेदारी प्रथा को लेकर सुगबुगाहट तेज ठेकेदार व अधिकारी के बीच सेटिंग

 

 

ठेकेदारी प्रथा बनी अनियमितता और भ्रष्टाचार का दरिया

 

विकास योजनाओं में जमकर हुआ बंदर बाँट

 

 

ठेकेदार- सचिव गठजोड़ पर पूर्व डीएम नें चलाया था चाबुक

गिरगिटिया सचिव नें गणेश परिक्रमा कर बचाई थी जान

 

 

फतेहपुर, जिले में ठेकेदारी प्रथा ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार और कमीशनबाजी का जरिया बनी हुई है. विकास कार्यों में लापरवाही और गुणवत्ता में कमी का कारण भी यही ठेकेदारी प्रथा है. हालांकि इसको लेकर कई बार जिले के आलाधिकारी ऐतराज भी जता चुकें हैं लेकिन प्रधान, पंचायत कर्मी व सचिवों के गठजोड़ के चलते यह किसी न किसी रूप में जारी है. आलोच्य वर्ष में बिंदकी तहसील क्षेत्र के रावतपुर, औंग, सौंह, सौंना खेडा, सौंरा और जनता ग्राम पंचायतों में हुए विकास कार्यो की जांच से यह जानना बिल्कुल मुश्किल नहीं होगा कि अघोषित ठेकेदारी से हुए काम धरातल पर कितना और कैसी गुणवत्ता से कराये गये हैं. गत वर्षों में कराए गए कामों की जाँच से ग्राम पंचायतों में प्रधान, रोजगार सेवक सचिव और स्थानीय अघोषित ठेकेदार के बीच के नापाक गठजोड़ का भांडा फोड़ा जा सकता है. बताते चलें कि सौंह गाँव के आदर्श शौंचालय की पडताल के दौरान ठेकेदारी से कराये गये काम की हकीकत सामनें आई और पर्यवेक्षक अधिकारियों व कर्मचारियों की जुगलबंदी का नमूना पेश आया । गुणवत्ता की जाँच करनें वाले जेई , एई व पर्यवेक्षण अधिकारियों शिथिलता ,गैर जिम्मेदारी और धन के बंदरबांट ने ग्राम पंचायतों में चल रही विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार व सिस्टम की संदिग्ध कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।

 

सूत्रों की मानें तो एक बैठक के दौरान विकास खण्ड मलवां के एक जिम्मेदार अधिकारी नें कथित ठेकेदार के पक्ष में अभी से तानाबाना बुनना शुरू कर दिया है। यह चर्चा भी आम है कि ग्राम पंचायत कोटिया,मलवाँ व रारी खुर्द सहित कई ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं में ठेकेदारी प्रथा परवान चढ़ रही है।

 

भाजपा के जीरो टालरेंस की नीति को मुंह चिढा रहे इस नापाक सिस्टोमैटिक ठेकेदारी गठबंधन पर जब तक मजबूत चोंट नहीं की जायेगी, तब तक विकास योजनाओं के लिये आने वाले सरकारी धन के बंदरबांट पर न लगाम नहीं लगाई जा सकेगी और न ही ग्राम पंचायत व ग्रामीण जीवन का धरातल पर अपेक्षित विकास हो पाना मुश्किल ही है.