शीर्षक: गाडी़ पलट गयी!
लेखक एस एम श्रीवास्तव!
जमीनी मामलों में सरकार की चुस्ती और भूमाफियों के विरुद्ध छिडे़ अभियान से शहर के रहवासी काफी खुश हैं! सबसे ज्यादा परेशानी गृह जनपद से दूर रह रहे प्रवासी नागरिकों को थी! इलाके के गुण्डे लोगों के बने बनाये घर जमीनों पर जबरन कब्जा कर लेते थे! बेचारा गृह स्वामी अपने बाल बच्चों की सुरक्षा को देखते हुये हार कर संतोष कर लेता था! और गुण्डे माफिया उस घर जमीन पर कब्जा कर लेते थे!
दिल्ली मुंबई नोयडा गाजियाबाद आदि शहरों में भूमाफिया अपने ऐसे ही कुकृत्यों से मालामाल हो रहे थे!
माल लगे न खोखा
रंग चोखा होय!!
बिना पूंजी का यह धंधा स्थानीय मनबढो़ के लिये भारी मुनाफे वाला धंधा बन चुका था! जिसे जब चाहो उसे गुण्डयी के बल पर अपने गांव शहर से धमकी दे कर भगा दो! और उसके घर जमीन को हथिया कर मंहगे दामों में बेंच दो! यही तो होता है बडे़ शहरों में! जमीन के निरंतर बढ़ते दामों और खूनी विवादों को खत्म करने के लिये ही सरकार ने कडे़ कानून बनाये हैं! जिससे हर कोई खुश है!
सरकार का डोन कैमरा से सर्वे व राजस्व अधिकारियों द्वारा जमीन मामलों का निपटारा कराया जाना वाकयी सराहनीय कदम है!
इससे बाहरी गांव शहर में रह रहा हर ब्यक्ति खुद को सुरक्षित मेहसूस कर रहा है!
अब किसी की जमीन न कोई गलत तरीके से हथिया सकता है! और न ही अपने गांव शहर से भगा सकता है!
सही तरीके से खरीदी गयी जमीन वो चाहे दिल्ली की हो या ओबरा बिल्ली दौलताबाद की हो उसके असल मालिक की है! कानून किसी को यह हक नहीं देता कि वो किसी को कहीं से भगा दे!
सबको पता है कि कुख्यात गुण्डा विकास दुबे का असल धंधा जमीन पर कब्जा करने का ही था!
अंजाम सबने देख लिया! कानून के आगे न ताकत काम आई और न गुण्डयी! ईश्वरीय दण्ड मिला! गाडी़ पलट गयी!

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