*भाग-01*
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*कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश*
– उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेशवासियों के जीवन और जीविका को सुरक्षित रखने के लिए संकल्पित है। इसी भावना के साथ हमने कोविड की इस द्वितीय लहर में आंशिक कोरोना कर्फ्यू की नीति अपनाई है। प्रदेशव्यापी आंशिक कोरोना कर्फ्यू के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। संक्रमण की चेन तोड़ने में इससे आशातीत सहायता मिल रही है। प्रदेशवासियों की ओर से भी भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है। एक्टिव केस लगातार कम हो रहे हैं। ऐसे में *31 मई की प्रातः 07 बजे तक आंशिक कोरोना कर्फ्यू को विस्तार दिए जाने का निर्णय लिया जा रहा है।* वैक्सीनेशन, औद्योगिक गतिविधियों, मेडिकल सम्बन्धी कार्य आदि आवश्यक अनिवार्य सेवाएं यथावत जारी रहेंगी। इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी जाएं।
– कोविड-19 की रोकथाम के लिए ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट की नीति के साथ सभी जिलों में जारी कोशिशों के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। एक समय जिस उत्तर प्रदेश के लिए विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि यहां मई के पहले सप्ताह ने एक लाख पॉजिटिव केस हर दिन आएंगे वहां आज कुल 94,482 एक्टिव केस ही हैं। 30 अप्रैल के 3 लाख 20 हजार एजटिव केस के पीक की स्थिति को देखें तो मात्र 21 दिनों में एक्टिव केस में 69.6 फीसदी की कमी आई है, जबकि वर्तमान में रिकवरी दर 93.2 फीसदी हो गई है। इस प्रभावी नियंत्रण में जिला प्रशासन के अधिकारियों, चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, निगरानी समितियों, आरआरटी और स्वच्छताकर्मियों की सर्वाधिक भूमिका है। उनका योगदान सराहनीय है।
– कोविड से बचाव के दृष्टिगत टीका-कवर अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में प्रदेश के 23 जनपदों में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों के टीकाकरण का कार्यक्रम चल रहा है। अब अगले चरण में आगामी एक जून से सभी जिला मुख्यालयों पर इस आयु वर्ग के लोगों का वैक्सीनेशन किया जाए। जिन जिलों में संक्रमण अपेक्षाकृत अधिक है, उनके ग्रामीण क्षेत्रों में भी वैक्सीनेशन कराया जाना चाहिए।
– भविष्य की आवश्यकताओं के दृष्टिगत प्रदेश में ऑक्सीजन प्लांट के स्थापना की कार्यवाही अभियान के रूप में संचालित हो रही हैं। भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए 286 नए ऑक्सीजन प्लांट की स्वीकृति प्रदान की है। उद्योग जगत से सीएसआर के माध्यम से और राज्य सरकार द्वारा एसडीआरएफ फंड से भी ऑक्सिजन प्लांट स्थापित कराए जा रहे हैं। हाल के दिनों में 43 नए प्लांट क्रियाशील हुए हैं। मुख्य सचिव स्तर से स्थापना संबंधी कार्यवाही की दैनिक समीक्षा की जाए।
– आज मैंने कानपुर और सैफई की व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। दोनों ही स्थानों पर टीम ने अच्छा कार्य किया है, इसे और बेहतर किया जा सकता है। कोविड की तीसरी लहर के दृष्टिगत सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में 100 बेड का पीकू वार्ड, 100 बेड का पोस्ट कोविड वार्ड और 100 बेड का डेडिकेटेड कोविड वार्ड तैयार कराया जाए। यहां 200 बेड का कोविड अस्पताल पूर्व से ही संचालित है।
– एग्रेसिव टेस्टिंग की नीति के अनुरूप विगत 24 घंटों में प्रदेश में 03 लाख 06 हजार 548 टेस्ट किए गए। टेस्टिंग में उत्तर प्रदेश सर्वाधिक टेस्टिंग करने वाला राज्य है। हमें टेस्टिंग और तेज करनी होगी।
– प्रदेश के सभी जनपदों में ऑक्सीजन की पर्याप्त बैकअप के साथ उपलब्धता सुनिश्चित रहे। होम आइसोलेशन के मरीजों को भी सहजता से ऑक्सीजन की आपूर्ति बनी रहे। सभी अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों में बैकअप सहित ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता रहे। प्रदेश में ऑक्सीजन की मांग में निरन्तर कमी आ रही है। राज्य में पर्याप्त बैकअप के साथ ऑक्सीजन की उपलब्धता है। बीते 24 घंटों ने 728 एमटी ऑक्सीजन वितरित की गई। इसमें मेडिकल कॉलेजों में 240 एमटी ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई। मेडिकल कॉलेजों में अब ढाई-तीन दिन तक का बैकअप हो गया है। होम आइसोलेशन के मरीजों को कल 2800 सिलिंडर आपूर्ति कराई गई है। यह व्यवस्था सुदृढ़ रखी जाए।
*भाग-02*
*कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश*
– विगत चार वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की दिशा में अच्छा कार्य किया है। 30 नए मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। चिकित्सा विश्वविद्यालय भी स्थापित हुआ है। निर्माणाधीन कार्यों को तेजी से पूर्ण किया जाए। वहीं, अब आवश्यकता है ग्रामीण क्षेत्र में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की। विशेषज्ञ तीसरी लहर का भी अनुमान लगा रहे हैं।ऐसे में स्वास्थ्य विभाग प्रदेश के सभी जनपदों की सीएचसी और पीएचसी में उपकरणों की मरम्मत, क्रियाशीलता, परिसर की रंगाई-पुताई, स्वच्छता और मैन पावर की पर्याप्त उपलब्धता के संबंध में इस संबंध विशेष कार्यवाही करे। इसके लिए एक विशेष टीम गठित हो, जो इसकी सतत मॉनीटरिंग करे। बेसिक शिक्षा विभाग में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की तर्ज पर स्वास्थ्य और मेडिकल एजुकेशन विभाग में भी अभियान चला कर व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
– प्रदेश में नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों और सदस्यों के शपथ ग्रहण और ग्राम पंचायत की पहली बैठक का कार्यक्रम शासन स्तर से घोषित कर दिया है। यद्यपि यह कार्यक्रम वर्चुअल होना है, फिर भी यह सुनिश्चित किया जाए कि गांवों में कोविड प्रोटोकॉल का अक्षरशः अनुपालन हो।
– ग्राम पंचायतों के प्रधान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोविड काल में उनका अतिरिक्त सक्रियता अपेक्षित है। गांवों को कोरोना से सुरक्षित रखने में निगरानी समितियों ने अब तक बहुत सराहनीय भूमिका निभाई है। शपथ ग्रहण के उपरांत निगरानी समितियों के मुखिया के रूप में प्रधान गण दायित्व निर्वहन करें। सदस्य गण भी निगरानी समितियों में शामिल होंगे। यथासम्भव पूर्व प्रधानों को भी निगरानी समितियों का हिस्सा बनाया जाए।
– कोविड संक्रमण के कारण कई दंपतियों की असमय मृत्यु हुई है।ऐसे अनाथ एवं निराश्रित बच्चों के भरण-पोषण और समुचित देखभाल के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। कार्ययोजना तैयार करते समय नवजात, शिशु, बालक, किशोर आदि आयु वर्ग की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए।
– ग्रामीण इलाकों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए निगरानी समितियों द्वारा स्क्रीनिंग का वृहद अभियान संचालित कर प्रत्येक लक्षणयुक्त तथा संदिग्ध संक्रमित व्यक्ति को मेडिसिन किट उपलब्ध करायी जा रही है। रैपिड रिस्पाॅन्स टीम द्वारा लक्षणयुक्त तथा संदिग्ध संक्रमित व्यक्तियों का एण्टीजन टेस्ट किया जा रहा है। सभी जनपदों में मेडिसिन किट एवं एण्टीजन किट की पर्याप्त उपलब्धता रहे। किसी भी जनपद में इनकी कमी नहीं होनी चाहिए।
– पोस्ट कोविड अवस्था में कतिपय रोगियों में ब्लैक फंगस का संक्रमण देखने में आ रहा है। ब्लैक फंगस से प्रभावित व्यक्तियों के उपचार की पूरी व्यवस्था की जाए। सभी जनपदों में ब्लैक फंगस के उपचार हेतु पर्याप्त मात्रा में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ब्लैक फंगस के उपचार की दवाएं हर जनपद में उपलब्ध करा दी गई है। निजी अस्पतालों में इस बीमारी का इलाज करा रहे रोगी भी सम्बन्धित मण्डलायुक्त को प्रार्थना पत्र देकर दवा प्राप्त कर सकते हैं।
– सभी जनपदों में कम्युनिटी किचन के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को फूड पैकेट उपलब्ध कराया जाए। डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था को सुदृढ़ रखा जाए, जिससे आम जनता को आवश्यक सामग्री की सुचारु आपूर्ति होती रहे।
– चार दशकों तक मासूम बच्चों के असमय काल-कवलित होने का कारण रहे जापानी इंसेफेलाइटिस और एईएस पर प्रभावी नियंत्रण कर बच्चों को सुरक्षित जीवन देने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने पूरी प्रतिबद्धता से कार्य किया है। आज इस बीमारी से मृत्यु की संख्या में 95 फीसदी तक कमी आ चुकी है। जेई की रोकथाम में हमारा अनुभव कोरोना की तीसरी लहर में अति उपयोगी होगा। सभी मेडिकल कॉलेजों में 100-100 बेड के पीकू की स्थापना की कार्यवाही तेजी से पूरी की जाए।
– कतिपय जनपदों में कुछ निजी कोविड अस्पतालों द्वारा सरकार द्वारा तय दर से अधिक की वसूली करने की शिकायतें मिल रही हैं। एक दर्जन अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। सभी जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि मरीज और उसके परिजनों का किसी भी प्रकार उत्पीड़न न हो। ऐसे असंवेदनशील अस्पतालों से मरीजों को अन्यत्र शिफ्ट करके, अस्पताल के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
– राज्य सरकार के अधीन किसी भी विभाग में कार्यरत किसी कार्मिक की मृत्यु यदि कोविड संक्रमण से हुई हो तो विभाग द्वारा संबंधित परिवार के प्रति पूरी संवेदनशीलता और सहानुभूतिपूर्वक यथोचित सहयोग किया जाए। अनुग्रह राशि का भुगतान हो या मृतक आश्रित सेवायोजन अथवा अन्य कोई प्रकरण, कोई फाइल लंबित न रहे। मुख्य सचिव स्तर से इस संबंध में यथोचित आदेश जारी कर व्यवस्था प्रभावी बनाने की कार्यवाही हो।

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