*कई महीने पूर्व रजिस्ट्रेशन पत्रावली गायब करने वाले लिपिक पर एआरटीओ मेहरबान*
*परिवहन आयुक्त ने जांच कराई तो वर्तमान और पूर्व एआरटीओ के साथ लिपिक और वाहन स्वामी पर गिर सकती है गाज*
*कौशाम्बी* योगी सरकार में भी भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश नहीं हो रहा है चारों तरफ अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ताजा मामला एआरटीओ कार्यालय में एक स्कूल वाहन के पंजीकरण से संबंधित है वाहन के रजिस्ट्रेशन के मूल पत्रावली विभाग में मौजूद नहीं है कई महीने से विभाग की पत्रावली को खोजने का झूठा प्रयास हो रहा है वाहन के रजिस्ट्रेशन में पत्रावली गायब करने वाला लिपिक जब कारवाही में फसने लगा तो फोटोस्टेट कागजात लगाकर वाहन की फर्जी पत्रावली तैयार कर दी मामले की शिकायत एआरटीओ से 3 महीने से हो रही है लेकिन उसके बाद भी दोषी लिपिक पर मुकदमा दर्ज करा कर विभागीय कार्यवाही एआरटीओ ने नहीं शुरू कराई है जिससे एआरटीओ की भी मंशा पर सवाल उठने लगे हैं बिना मूल अभिलेखों के वाहन का रजिस्ट्रेशन कैसे कर दिया गया है लेकिन 3 महीने बीत जाने के बाद भी संबंधित वाहन की पत्रावली के मूल अभिलेख एआरटीओ कार्यालय के कर्मचारी नहीं खोज सके हैं एआरटीओ कार्यालय के लिपिक से सांठगांठ कर फर्जी तरीके से वाहन का पंजीकरण कराने का आरोप वाहन स्वामी पर लगा है मामले में एआरटीओ कार्यालय में पलने वाले दलालों की भी भूमिका सवालों के घेरे में है एआरटीओ कार्यालय में पूरे दिन दलालों का दबदबा रहता है इस बात की गवाही एआरटीओ कार्यालय का सीसीटीवी कैमरे दे रहे हैं लेकिन फिर भी एआरटीओ मूक दर्शक बने हैं तीन महीने पहले भरवारी कस्बे के एक व्यक्ति ने मामले की शिकायत एआरटीओ से की थी जिस पर एआरटीओ ने संबंधित लिपिक से पत्रावली पेश करने का निर्देश दिया लेकिन लिपिक पत्रावली खोज कर एआरटीओ के सम्मुख नहीं प्रस्तुत कर सके हैं मामले में कर्मचारियों की लापरवाही कहें या फिर अभिलेखों में हेरा फेरी कर फर्जी तरीके से वाहनों में गलत स्वामियों के नाम हस्तानांतरण कर उनके पंजीकरण के मामले में जांच से बचने के लिए साजिश के तहत पत्रावली गायब हुई है मामला बेहद गंभीर है और इस मामले में परिवहन आयुक्त ने जांच कराई तो वाहन स्वामी के साथ-साथ विभाग के संबंधित लिपिक और तत्कालीन एआरटीओ पर मुकदमा दर्ज हो सकता है सूत्रों की मानें तो वाहन स्वामी पश्चिम शरीरा क्षेत्र का एक स्कूल संचालक है और वाहन को बगैर स्कूल की मान्यता के फर्जी नामों से पंजीकृत कर दिया गया है जिस पर फर्जी अभिलेखों के सहारे वाहन को एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण कराए जाने का आरोप है मामले में संबंधित लिपिक की भी भूमिका सवालों के घेरे में है विभाग में वाहन पंजीकरण की फाइल न मिलने के बाद वर्तमान एआरटीओ दोषियों को बचाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं जिससे उनकी भी भूमिका सवालों के घेरे में हैl FTR

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