June 28, 2026

आस्था पैथोलॉजी, मंजू नर्सिंग होम एवं त्रिमूर्ति हॉस्पिटल का पोल खुलना शुरू- T.N SINGH

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*आस्था पैथोलॉजी, मंजू नर्सिंग होम एवं त्रिमूर्ति हॉस्पिटल का पोल खुलना शुरू, पहली रिपोर्ट आई सकरात्मक*

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……*पुलिस ने लिखित रूप में दिया पैथोलॉजी एवं चिकित्सक की साठ-गांठ होने की आख्या रिपोर्ट*

….*प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र का नतीजा आना शुरू, जल्द कार्रवाई की जगी आस*

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*कैंट पुलिस ने लिखित रूप से माना है कि विपक्षीगणों डॉक्टर वीपी सिंह, डॉ. बृजेश सिंह, डॉ. मनोज गुप्ता एवं अन्य डाक्टर्स द्वारा स्वयं लाभ पहुंचाने कि नियत से गलत रिपोर्ट तैयार कराकर इलाज करना अपराध किया गया है*।

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वाराणसी। कैंट थानांतर्गत अर्दली बाजार क्षेत्र में वर्षो से संचालित “आस्था पैथोलॉजी”, मंजू नर्सिंग होम एवं गिलट बाजार स्थित त्रिमूर्ति हॉस्पिटल में चिकित्सकों, अस्पताल के संचालको की सांठ-गांठ से खून जांच, इलाज के नाम पर पर हो रहे मरीज़ो की जान के साथ सौदेबाजी की जांच कराकर उचित कार्यवाई करने एवं इस घिनौने कार्य में शामिल समस्त दोषियों के साथ अविलम्ब दण्डात्मक, कठोरतम कार्यवाई किए जाने के संदर्भ में पत्रकार संजल प्रसाद द्वारा किये गए शिकायत पत्र की जांच आख्या आनी शुरू हो गई है। इसी का नतीजा यह है कि 7 अप्रैल 2021 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी संदर्भ संख्या 20019721005950 में कैन्ट पुलिस के उप निरीक्षक चौकी प्रभारी अर्दली बाजार बनारसी यादव ने अपनी निस्तारण जांच आख्या को 9 अप्रैल 2021 को जनसुनवाई पोर्टल एप्प पर डाल दिया है। इस रिपोर्ट में लिखित तौर पर कैंट पुलिस ने माना है कि शिकायतकर्ता संजल प्रसाद (वरिष्ठ पत्रकार) के विपक्षीगणों आस्था पैथोलॉजी के डॉ. बृजेश सिंह, मंजू नर्सिंग होम के डॉक्टर वीपी सिंह, त्रिमूर्ति हॉस्पिटल के डाक्टर मनोज गुप्ता संचालकों एवं अन्य चिकित्सकों ने स्वयं को लाभ पहुंचाने कि नियत से गलत रिपोर्ट तैयार कराकर इलाज करना अपराध किया गया है। बताते चले कि शिकायतकर्ता संजल प्रसाद (वरिष्ठ पत्रकार) ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के संदर्भ संख्या 20019721007520 को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने उसे संदर्भ संख्या 20019721006017 और सन्दर्भ संख्या 20019721005950 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी कैन्ट, थाना प्रभारी कैन्ट को विभिन्न प्रक्रिया से गुजरते हुए कार्रवाई के लिए अग्रसारित किये थे। इस मामले की जांच उप निरीक्षक बनारसी यादव ने किया। जांचोपरांत शिकायत करने वाले कि सम्पूर्ण मामले को सही पाते हुए उसकी आगे कि कार्यवाही के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखा गया है। इसे जनसुनवाई पोर्टल पर भी देखा जा सकता है। समस्त प्रकरण यह था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में कैंट थानांतर्गत अर्दली बाजार इलाके में संचालित “आस्था पैथोलॉजी”, मंजू नर्सिंग होम, त्रिमूर्ति हॉस्पिटल में कई चिकित्सकों, अस्पताल के संचालको की सांठ-गांठ से जांच, इलाज की आड़ में मरीज़ो की जान का सौदा (खिलवाड़) किया जा रहा है। यहां जो भी मरीज चिन्हित चिकित्सक के द्वारा अपने खून की जांच करा रहें है उनमें से अधिकांश मरीजों को चिकित्सक, संचालक के मनमुताबिक ही जांच की रिपोर्ट बनाकर दिए जा रहे है इसकी निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई किया जाय।

बताते चले कि वरिष्ठ पत्रकार संजल प्रसाद पुत्र श्री लछमन प्रसाद, मकान नम्बर s -25/250, सरसौली, भोजूबीर, पोस्ट+ थाना- कैंट, जिला- वाराणसी, को 22 फरवरी को देरशाम घर पर सीने में तेज दर्द उठा, कुछ दवा खाने और स्थानीय निजी चिकित्सक के जांचोपरांत उन्हें आराम नही मिलने पर परिजन उन्हें सर्वप्रथम कैंट थाना क्षेत्र के ही प्लाट नम्बर 10, विंध्यवासिनी नगर कालोनी, अर्दली बाजार निवासी डाक्टर वी.पी. सिंह (mbbs) के यहाँ ले गए। डाक्टर वीपी सिंह यहां मंजू नर्सिंग होम के नाम से अपनी क्लिनिक चलाते है। यहां पहुंचने पर काफी देर बाद चिकित्सक आये और अपना पूरा फीस, जांच फीस पहले मरीज के परिजनों से जमा कराए उसके बाद खुद दूर बैठकर मरीज का ईसीजी, ब्लड प्रेशर, सुगर की जांच अपने एक कर्मचारी द्वारा करवाये। जांचोपरांत चिकित्सक ने परिजनों के अनुरोध पर काफी देर बाद तड़पते हुए मरीज को कुछ इंजेक्शन, दवा दिलवाये। चिकित्सक डाक्टर वीपी सिंह ने उस मंजू नर्सिंग होम के लेटर पैड पर कई जरूरी जांच, दवा लिखा।

पैथोलॉजी का जांच लिखने के बाद चिकित्सक ने मरीज एवं उनके परिजनों से जोर देते हुए कहा कि जांच कराकर सुबह 23/2/2021 को हमको रिपोर्ट जरूर दिखा देना, इसके बाद हम फोन कर देंगे तो मरीज को गिलट बाजार स्थित त्रिमूर्ति हॉस्पिटल या फिर मकबूल आलम रोड स्थित शुभम हॉस्पिटल में भर्ती करा देना। चिकित्सक की सलाह मानकर जब मरीज ने अपना जांच कैंट थाना क्षेत्र के ताजपुर, अर्दली बाजार स्थित आस्था पैथोलॉजी में कराया तो उसके परिणाम चौकाने वाला आया। मरीज को जांच रिपोर्ट पर तब शंका होने लगी जब उसने देखा कि हृदय रोग से सम्बंधित “Cardiac marker” crt trop-t जैसी गंभीर बीमारी के जांच रिपोर्ट में आस्था पैथोलॉजी द्वारा लिखित रूप से पॉजिटिव दिखा दिया गया है जबकि वहीं पैथोलॉजी द्वारा जो जांच किट लगाया गया है उसमे निगेटिव दिखाया गया है। इसको देखते ही मरीज ने इसकी वास्तविकता की जांच के लिए लगभग आधा दर्जन से अधिक पैथोलॉजी चलाने वालों से, कई नामी गिरामी सरकारी, गैर सरकारी ह्रदय रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से सम्पर्क किया, रिपोर्ट दिखाया तो लगभग सभी ने बताया कि रिपोर्ट पूरी तरह गलत है। इसके पहले अगले दिन जब मरीज ने इस रिपोर्ट को लेकर त्रिमूर्ति हॉस्पिटल पहुंचा तो यहां कार्यरत हृदय रोग के वरिष्ठ चिकित्सक डाक्टर मनोज गुप्ता ने जांच रिपोर्ट देखा और मरीज को इमरजेंसी वार्ड में लिटाकर कुछ दवा खिलवाये और देखते ही देखते अस्पताल के कर्मचारियों से पेट और कमर में दो-तीन इंजेक्शन ठोकवा दिया। थोड़ी देर बाद मरीज के परिजनों को अपने चेम्बर में बुलाकर बोले कि मरीज की हालत ठीक नही है इनका तत्काल एंजियोग्राफी करवा लीजिए। अगले दिन मरीज को सुबह पहुंचते ही बताया गया डाक्टर आएंगे तो जांच करेंगे। खास बात तो यह है कि डॉक्टर के आने के पहले ही वहाँ के कर्मचारियों ने हजारों रुपये का इंजेक्शन और दवा मंगा लिया। डाक्टर मनोज गुप्ता के आने के पहले ही मरीज का ईसीजी भी कर लिया गया। हृदय रोग के अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर की माने तो जब एंजियोग्राफी होनी ही थी तो फिर ईसीजी क्यों किया गया। जबकि एक दिन पहले ही डाक्टर वीपी सिंह के यहां ईसीजी भी हुआ था। खैर यहां जब मरीज का एंजियोग्राफी हो रहा था उसी दौरान बीच में ही चिकित्सक और उनके कर्मचारियों ने मरीज के परिजनों को आपरेशन कक्ष में बुलाया और भला बुरा समझाते हुए, जान का खतरा बताते हुए अविलम्ब 1 लाख 25 हज़ार रुपये जमा करने और मरीज को तत्काल सीने में छल्ला डालने की बात करने लगे। सवा लाख रुपये का इंतजाम करके बाद में छल्ला डलवाने के अनुरोध पर उसे लम्बी चौड़ी दवा की लिस्ट इस हिदायत के साथ सौपीं गई कि यदि एक सप्ताह के भीतर छल्ला नही डलवाये तो कुछ भी हो सकता है जिसकी जिम्मेदारी त्रिमूर्ति हॉस्पिटल व डाक्टर मनोज गुप्ता का नही होगा। अगले दिन बीएचयू में हृदय रोग के एक अन्य विशेषज्ञ के पास पहुंचा तो उस चिकित्सक ने भी “आस्था पैथोलॉजी” और “त्रिमूर्ति हॉस्पिटल” के रिपोर्ट को ही सही मानते हुए एक लाख रुपए का खर्च बताकर तत्काल छल्ला डालने के लिए तैयार हो गए। बताया गया कि जो जांच रिपोर्ट है उसके हिसाब से छल्ले डालना ही अंतिम विकल्प है। कुछ देर बाद बीएचयू के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमशंकर जी को दिखाया गया तो उन्होंने त्रिमूर्ति हॉस्पिटल में हुए एंजियोग्राफी की सीडी मांगा, सीडी की और आस्था पैथोलॉजी जाँच रिपोर्ट की गहनता से जांचोपरांत वरिष्ठ चिकित्सक डाक्टर ओमशंकर जी बोले कि घबराने की कोई ज्यादा बात नही है और नही तत्काल छल्ला डालने की ही आवश्यकता है। इस हालत में मरीज को दवा से भी ठीक किया जा सकता है। फिलहाल अभी डाक्टर ओमशंकर जी का ही मरीज को दवा चल रहा है। इस सम्बंध में जब आस्था पैथोलॉजी संचालक के मोबाइल नंबर 9415256305 पर मरीज ने बात किया और जांच रिपोर्ट सही नही होने की बात कही तो उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा कि मेरे घर में भी पत्रकार, वकील, जज है। खास बात यह है कि आस्था पैथोलॉजी, मंजू नर्सिंग होम एवं त्रिमूर्ति हॉस्पिटल की सामाजिक छवि काफी खराब हो चुकी है। आने वाले दिनों में (भविष्य में) जब भी मुझे हृदयाघात या इससे सम्बंधित कोई बीमारी होती है तो इसकी समस्त जिम्मेदारी आस्था पैथोलॉजी के डॉक्टर बृजेश सिंह, मंजू नर्सिंग होम के डाक्टर वीपी सिंह और त्रिमूर्ति हॉस्पिटल के डॉ. मनोज गुप्ता एवं संचालक पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे। इन लोगों की वजह से मेरा शारिरिक, आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक उत्पीड़न हुआ है। मरीज ने जिस आस्था पैथोलॉजी , S- 24/3-1ए ताजपुर, अर्दली बाजार, वाराणसी, पैथोलॉजी रजिस्ट्रेशन नंबर – al-1534, पैथोलॉजी का संचालन dr. s.k. singh (m.b.b.s) एवं dr. u.s. gupta, m.b.b.s.m.d. (path), (consultant pathologist) के संरक्षण में संचालित हो रहा है। मरीज का Report no – 6979ap।।1है। शिकायतकर्ता संजल प्रसाद (वरिष्ठ पत्रकार) प्रदेश महामंत्री, प्रादेशिक जनर्लिस्ट एशोसिएशन ने मुख्यमंत्री से 15 मार्च 2021को जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग किया था।