May 6, 2026

आइसा के प्रदर्शन की सूचना से घबराए एनएफएस कांड के आविष्कारक बद्रीनारायण तिवारी ने जी. बी. पन्त को पुलिस छावनी में तब्दील करा दिया-

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PRYAGRAJ,,,

आईसा का जबरदस्त प्रदर्शन.. आइसा के प्रदर्शन की सूचना से घबराए एनएफएस कांड के आविष्कारक बद्रीनारायण तिवारी ने जी. बी. पन्त को पुलिस छावनी में तब्दील करा दिया था, पुलिस के दहशत के बावजूद आइसा ने प्रदर्शन किया।

आइसा इकाई सचिव पीएचडी छात्र Manish Kumar ने शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंप चयन समिति और चयन प्रक्रिया पर कई सवाल उठाएं हैं – प्रोफेसर भर्ती में एक आवेदक के पिता चयन समिति के सदस्य कैसे हो सकते हैं ? विज्ञापन जारी करने वाली अधिकारी स्वंय ही एसोसिएट प्रोफेसर की आवेदक भी हैं तो इस भर्ती की सुचिता और निष्पक्षता की गारंटी कैसे होगी ? जब सेलेक्शन कमिटी ही अवैध है तो नियुक्ति वैध कैसे ?

इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए अनरिजर्व्ड कैंडिडेट की एपीआई 87 तक थी तो 87 से ऊपर एपीआई वाले (ईडब्ल्यूएस, एसटी, एससी, ओबीसी ) कैंडिडेट को अनरिजर्व कैटेगरी में शामिल क्यों नहीं किया गया ? चयन समिति में शामिल सदस्यों पर जब पूर्व में अनियमितता व भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं तो पुनः उनको शामिल करने की क्या मजबूरी थी ?

प्रदर्शन सभा में मनीष कुमार ने आगे कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा मनमाने तरीके से बिना नेट व अनुभव वाले अभ्यर्थी को अधिक नंबर दे कर अपने चहेतों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट करने के साथ चयन किया गया. जब 93 नम्बर वाले ओबीसी कैंडिडेट को अनरिजर्व्ड कैटेगरी या ओबीसी कैटेगरी में भी शामिल नहीं किया गया तो 82 नम्बर वाला सवर्ण कैंडिडेट अनरिजर्व्ड कैटेगरी में चयनित कैसे हुआ।अनरिजर्व्ड का मतलब सवर्ण नहीं होता है। इस पूरी चयन प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों की पूर्ण अवहेलना की गई है.

सेलेक्शन (चयन ) तो तब सही होगा जब सेलेक्शन कमेटी सही हो. यहाँ तो एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर (AO) से लेकर पूरी चयन समिति और चयन प्रक्रिया पर सवाल ही सवाल उठ रहें हैं . इंटरव्यू में कम नम्बर देकर वंचित तबके के अभ्यर्थियों को शोध से लेकर नौकरियों तक से वंचित किया जा रहा है। इसके पीछे सवर्ण सामंती जातीय मानसिकता काम कर रही है जिसको सत्ता का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।

शिक्षा मंत्री को सम्बोधित ज्ञापन जी बी पंत के सेक्शन ऑफिसर प्रोफेसर एल. डी. यादव ने रिसीव किया।

आज इस ज्ञापन के माध्यम से आइसा मांग करता है कि इस भर्ती की न्यायिक जांच कराई जाए और स्क्रीनिंग कमेटी, सिलेक्शन कमेटी, बोर्ड आफ गवर्नर्स व निदेशक बद्रीनारायण तिवारी समेत दोषियों को दंडित किया जाए । त्वरित व उचित कार्रवाई नहीं होने पर आइसा अभियान चलाकर बड़े आंदोलन करने को मजबूर होगा।

आइसा के पूर्व इकाई सचिव व पीएचडी छात्र सोनू यादव ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन , दिल्ली विश्वविद्यालय की दलित प्रोफसर डॉ. ऋतु सिंह , बीएचयू की पत्रकारिता विभाग की दलित प्रोफेसर शोभना समेत डीडीयू के प्रोफेसर राजेश गुप्ता को सवर्ण-सामन्ती जातिवादी वर्चस्व का शिकार होना पड़ रहा है।

आइसा दलित उत्पीड़न के खिलाफ और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष को और भी तेज करेगा।