*अपराध की दुनिया में कदम रखने वालों का होता है एक ही अंजाम*
अरशद आलम
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बड़े-बुजुर्ग कह गए कि गलत रास्ता हमेशा गलत मंजिल पर ही ले जाता है। आगाज़ चाहें कितना भी धमाकेदार क्यों न हो, अंजाम हमेशा बुरा ही होता है, हमेशा नज़ीर ही बनता है। ये वो गली है जो अपनी तरफ खींचती जरूर है लेकिन इसमें हर बार दूसरी तरफ रास्ता बंद ही मिलता है।
जरायम की दुनिया की चकाचौंध से दिशाभ्रमित होने वाले तमाम युवा भी शहर के लिए कुछ ऐसी ही नज़ीर हैं, जो कुछ भी कर सकते थे मगर उन्होंने गलत रास्ता चुना और अपनों का या पुलिस की गोली का शिकार बन गए। एक-दो नहीं बल्कि कई बदमाशों का अंत ऐसे ही हुआ। आज हालत यह है कि उनके परिवार को कोई पूछने वाला भी नहीं है।
जैतपुरा के ईश्वरगंगी का रहने वाला सुरेश गुप्ता कभी डिप्टी मेयर अनिल सिंह का बेहद करीबी था। डिप्टी मेयर के साथ रहने वाला प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी भी उसकी कोई बात नहीं काटता था। सुरेश ने अपना पूरा जीवन गैंग को बढ़ाने में लगा दिया। बाद में जब मुन्ना बजरंगी ने ईश्वरगंगी छोड़कर अपना गैंग बनाया तो उसी के शूटरों ने सुरेश गुप्ता को ठिकाने लगा दिया। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक 2003 में बजरंगी गैंग के शूटरों ने सुरेश गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी। इसी वर्ष बजरंगी गैंग से नाखुश चल रहे रिंकू गुप्ता ने अपने ही गैंग के महेश यादव को गोलियों से भून दिया। ऐसा ही हश्र सभासद मंटू यादव का हुआ। उसे 20 दिसंबर 2003 को फातमान रोड पर उसके करीबियों ने ही गोली मार दी।
बजरंगी गैंग से जुड़े सभासद बंशी यादव की हत्या जिला कारागार के गेट पर नौ मार्च 2004 को गैंग के ही अन्नू त्रिपाठी और बाबू यादव ने कर दी, जबकि इसी गैंग से जुड़े सभासद मंगल प्रजापति को 21 दिसंबर 2005 में उसके करीबियों ने मारा डाला। मंगल के बाद उसी वार्ड के सभासद राकेश उर्फ लंबू भी 25 मई 2007 को नजदीकियों ने ही निशाना बनाया। लंबू मंगल का करीबी था और उस पर मंगल की हत्या का आरोप था। उसे घर से बुलाकर गोली मारी गई। 2005 में जेल में ही अन्नू त्रिपाठी को एक अदने से बदमाश संतोष गुप्ता किट्टू ने मार डाला। बाद में 4 जून 2010 की रात तत्कालीन एसओजी प्रभारी गिरजाशंकर त्रिपाठी की टीम ने डेढ़ लाख के इनामी हो चुके संतोष गुप्ता किट्टू को उसके साथी सन्तोष सिंह के साथ तेलियाबाग-चौकाघाट मार्ग पर मार गिराया था।
दालमंडी में भी कई लोग अपनो के घात के शिकार हुए है, चाहे दिन दहाड़े हुई सभासद कमाल की हत्या हो या दालमंडी में चर्चित छोटे मिर्जा की हत्या हो, इसी प्रकार चर्चित बंदमाश काले अन्नू को भी उसके ही करीबियों ने रामनगर थाना क्षेत्र में मार के फेंक दिया था, इसी प्रकार दालमंडी के ही बदमाश राजू बम को मारकर अलईपुरा के पास रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया था, 2012 में राज्यमंत्री रहे शकील बबलू के छोटे भाई शेखू को भी अल सुबह दालमंडी में गोलियों से भून दिया गया।
इसी प्रकार ब्रजेश गैंग से जुड़े ठेकेदार सुनील सिंह, गुड्डू सिंह, पप्पू सिंह, बिहार के कोल किंग राजीव सिंह भी अपने लोगों के शिकार हो गए।
जरायम की दुनिया में चर्चित मुख्तार और बजरंगी के शूटर रमेश उर्फ बाबू यादव के 30 जुलाई 2008 को शास्त्री नगर, सिगरा में मारे जाने के बाद आज परिवार की कोई खबर लेने वाला नहीं है। सिद्धगिरी बाग में गैंगवॉर के दौरान उसी शाम बाबू को गोली लगी और भागते समय सिगरा में वो पुलिस की गोली का निशाना बन गया।
2007 से 2010 के बीच अपराध जगत में डंका बजाने मैदान में उतरे उस समय के कुख्यात बदमाशो राजू तिवारी, रिंकू तिवारी, दुर्गा अग्रहरि, श्याम कश्यप, दीपक सिंह बहेड़ा, उमेश पहलवान, महाजन पटेल, सन्तोष गुप्ता किट्टू, सन्तोष सिंह आदि बनारस के तत्कालीन एसओजी प्रभारी गिरजाशंकर त्रिपाठी की टीम का निशाना बने और अपराध जगत का सुरमा बनने का अरमान लिए इस फानी दुनिया से रुखसत हो गए थे
हालिया घटनाओं में 2018 में कैंट थाना क्षेत्र के खजूरी में अधिवक्ता अभिषेक सिंह प्रिंस पर उसी के साथी विवेक सिंह कट्टा द्वारा जानलेवा हमले का प्रयास शामिल है जिसमे प्रिंस तो बच गया लेकिन आसिफ नामक युवक की मौत हो गई थी, इसको 2013 में विवेक कट्टा की रामनगर क्षेत्र में गोली मार के हत्या के प्रयास के बदले के रूप में भी देखा जा सकता था और इसके 2 वर्ष बाद 2020 में 28 अगस्त 2020 को चौकाघाट इलाके में अभिषेक प्रिंस की हत्या हो गई, इस घटना में विवेक कट्टा जेल में है और 2 लाख का इनामी मनीष सिंह सोनू फरार चल रहा है।
2014 कि अगस्त महीने में मिर्जापुर जनपद के अहरौरा के खप्पर बाबा आश्रम के पास का चर्चित गैंगवॉर भी नज़ीर है। मुम्बई में एनकाउंटर में मारे गए मुन्ना बजरंगी के कुख्यात शूटर कृपा चौधरी का दामाद और 50 हज़ार का इनामी राजेश चौधरी इसी गैंगवॉर में अपने 2 अन्य साथियों के साथ मारा गया था। पुलिस रिकार्ड्स के मुताबिक राजेश अब जरायम से तौबा कर जमीन के धंधे में लग गया था। उसके साथ मारा गया कल्लू पांडेय दौलतपुर के एक प्रतिष्ठित परिवार का लड़का था। खुद इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके कल्लू का भी आपराधिक इतिहास रहा था। खैर राजेश चौधरी की हत्या करने वाले अमजद और पिंटू भी नही बचे और यूपी एसटीएफ ने इन दोनों को प्रयागराज में हुई मुठभेड़ में मार गिराया था।
2018 में शातिर बदमाश रईस बनारसी भी बदमाशों की आपसी गोलीबारी में मारा गया।
ऐसी ही एक घटना 2012 में हुई थी। जब हनी गैंग के गुर्गे लूट के माल के बंटवारे को लेकर आपस में भिड़ गए। नतीजा रंजीत गौड़ उर्फ बाड़ू और एक अन्य युवक की हत्या कर शवों को निर्माणाधीन सड़क में दफनाने के रूप में सामने आया। बाड़ू का पिता रिक्शा चलाता था और मां अपनी झुग्गी में कपड़े धोती थी। बेटे के लापता होने के बाद मां महीनों तक अफसरों की चौखट पर सिर पटकती रही।
आखिरकार बेटे का पता भी चला तो सड़क के नीचे से जेसीबी से खोद कर लाश निकाली गई, जिसे पहचान पाना भी मुश्किल था। इकलौते बेटे से मां-बाप ने बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद लगाई थी, मगर जरायम की दुनिया में उसके बहके कदमों ने उनके कंधे पर अर्थी का बोझ डाल दिया।
2014 में आतंक का पर्याय बने शातिर हेमंत मौर्य को भी कमच्छा शराब ठेके के पास पुलिस ने ढेर कर दिया था
2015 की 29 जुलाई को अपराध जगत का किंग बनने की चाहत रखने वाले पढ़े लिखे बदमाश सनी सिंह को भी यूपी एसटीएफ ने कबीरचौरा इलाके में मार गिराया
नवम्बर 2020 में मोनू चौहान और रौशन गुप्ता किट्टू को क्राइम ब्रान्च प्रभारी अश्विनी पांडेय की टीम ने मार गिराया
2021 में 1 लाख के इनामी दीपक वर्मा को भी एसटीएफ ने चौबेपुर इलाके में ढेर कर दिया।
2022 में 21 मार्च को आखिरकार 2 लाख का इनामी मनीष सिंह सोनू भी यूपी एसटीएफ के साथ वाराणसी के लोहता इलाके में हुई मुठभेड़ में मारा गया

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