January 21, 2022

सफ़र उर्दू का या फिर अंग्रेजी का होगा साहब ? गोयल साहब की ये लेट लतीफ़ ट्रेन तोडती है सपने,

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माना कि पत्रकारिता का ये मतलब नही कि केवल किसी कि कमियों को उजागर करते रहो। मगर सच को छिपाया भी तो नही जा सकता है। सच को छुपाने वाले एंकरों की कमी इस देश में कहा है। आप किसी भी समय अपने चैनल्स को बदल के तो देखे कई खुबसूरत कपड़ो से सजे रंग बिरंगी टाई लगा कर बैठे लोग अपनी बात में देश का सबसे उर्जावान मंत्री पियूष गोयल को सिद्ध कर रहे होंगे। हकीकी ज़मीन पर इसकी सच्चाई की परत तब खुलती है जब आप किसी ट्रेन से एक खास मकसद से जा रहे होते है। ट्रेन घंटे नहीं घंटो की लेट लतीफी के साथ चल रही हो। उसी दौरान उस रेल के महकमे के सरपरस्त मिनिस्टर सियासी पाँव को फैलाते हुवे नेटवर्क के बढाओ पर लम्बी चौड़ी तक़रीर कही दे रहे होते है। या फिर शायद अपने प्रवचनों से सोशल मीडिया पर खुबसूरत पोस्ट कर रहे होते है।