October 23, 2021

*पत्रकार vs पुलिस* *आखिर गुनाहगार कौन*

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देश मे आज पत्रकारिता संकट के दौर से गुजर रहा है । चौथा स्तम्भ माने जाने वाले पत्रकार को आखिर क्या देती है भारत सरकार। कौन कौन सुविधा देती है कोई नेता संसद में कभी इनकी अवाज को उठाती हैं इनकी सुरक्षा की, लेकिन पुलिस देती है पत्रकार को झूठा fir में फसाने का धमकी। ऑए दिन होने वाले घटना को जब पत्रकार अपना जान हथेली पर रख कर कवरेज करने जाता है तो उसको ये नही पता होता है कि जो सच्चाई दिखाने वो जा रहा है उसी खबर पर उसके ऊपर केस भी हो जाता है । लेकिन फिर भी पत्रकार अपनी फ़र्ज़ को बखूबी निभाते है । वही बात किया जाय पुलिस का वो सपथ जरूर लेते है कि पूरी ईमानदारी से ड्यूटी निभाएंगे लेकिन कहि न कही दबाव में आकर वो भूल जाते है ।

*पुलिस की मासिक बेतन 30 हजार वही पत्रकार रका नाम मात्र*

पुलिस का मासिक बेतन 30 हजार होने के बाद भी उनका पेट नही भरता वो हर जगह ढूढ़ते है हर कार्य के बदले कुछ घुस चाहिये तब वो करते है कोई कार्य। अगर आप एक चोरी का fir भी करते रहे तो उसके भी बदले उनको कुछ चाहिये। वही पत्रकार का मासिक बेतन सिर्फ नाम मात्र का मिलता है फिर भी वो अपनी ड्यूटी बहुत ही ईमानदारी से निभाता है ।

*एक बार पुलिस की नौकरी मिल गई तो सालो में ही लगभग करोड़ो का घर बन जाता है लेकिन पत्रकार पूरा जीवन बिताने के बाद भी एक मकान ढंग का नही बनवा पाता है*। आखिर कब तक सुनेगी भारत सरकार हम पत्रकारों की आवाज को कहनें को हम चौथा स्तम्भ है लेकिन डरे-डरे से है हमारे कदम़ !साभार।