January 21, 2022

*धार्मिक शिक्षा से ही सुधरेगा देश का वातावरण* -पूज्य शंकराचार्य जी महाराज

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आज की शिक्षा पद्धति भारत की प्राचीन परम्परा के अनुरूप नहीं है । शिक्षा केवल व्यवसाय पाने का माध्यम हो गया है । यह शिक्षा जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए उपयोगी नहीं है । यदि बच्चों को रामायण की शिक्षा दी जाएगी तो वे जानेंगे कि सीता जी के अपहरण करने का क्या परिणाम हुआ था और महाभारत की शिक्षा दी जाएगी तब समझेंगे कि द्रौपदी के अपमान से कैसे कुरु कुल का नाश हुआ था । यह विडम्बना है कि भारत में हम अपने बच्चों को धर्म की शिक्षा नहीं दे सकते ।

उक्त बातें पूज्यपाद अनन्तश्रीविभूषित उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज परमधर्मसंसद् के द्वितीय दिवस पर अपने प्रवचन में कही ।

*विवाह संस्कारे खतरे में*

उन्होंने कहा कि भारत पतिव्रता नारियों का देश है और आजकल यहाँ पर ऐसे कानून बनाये जा रहे हैं जो विवाह संस्कार के महत्व को ही समाप्त कर रहे हैं । हमें यह सोचना होगा कि हम कैसा देश अपने आने वाली पीढी को दिखाना चाहते हैं ।

*यह परमधर्मसंसद् किसी के विरोध या समर्थन में नही*

पूज्य शंकराचार्य जी ने स्पष्ट कहा कि जिस प्रकार दूसरे लोग मोदी लाओ देश बचाओ का नारा देकर धर्मसंसद् लगाते हैं यह धर्मसंसद् ऐसी नहीं है । यहाँ पर सभी लोग स्वस्थ मन से चर्चा कर रहे हैं ।

*साधु को निष्पक्ष व निडर होना चाहिए*

आगे कहा कि साधु को निषपक्ष होना चाहिए । और हम मोदी के के विरोधी नहीं हैं अपितु उनके द्वारा किए जा रहे अनुचित कार्यों के विरोधी हैं और जो भी सरकार होगी यदि वह अनुचित करती है तो शंकराचार्य के पद पर होने के कारण हमें उचित और सत्य तथ्य की बात ही कहना होगा ।

*विदेशी प्रतिनिधियों ने किया शंकराचार्य जी का पादुका पूजन*

पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के प्रवचन के पूर्व विदेशों से आए प्रतिनिधियों ने एक साथ पादुका पूजन किया ।

संचालन स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने किया ।