April 30, 2026

तबादले की भीख मांगते रहे प्रयागराज के एक डाॅक्टर, आदेश तब आया, जब हो गई उनकी विदाई-

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तबादले की भीख मांगते रहे प्रयागराज के एक डाॅक्टर, आदेश तब आया…..जब हो गई उनकी विदाई_______

 

प्रयागराज___जिंदगी का अधिकांश समय सरकारी सेवा में देने वाले एक चिकित्सक के साथ नियति का कुछ ऐसा बर्ताव हुआ जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप सकती है। चित्रकूट के जिला अस्पताल में 11वर्ष से कार्यरत सर्जन डॅा० दीपेन्द्र सिंह शासन से पत्राचार कर अपना तबादला प्रयागराज के लिए मांगते रहे। उनकी यह इच्छा तब पूरी हुई जब बीमारी से लड़ते लड़ते दम निकल गया। डाॅक्टर दीपेंद्र का तबादला सरकार ने कर तो दिया लेकिन आदेश उनकी तेरहवीं के बाद आया। पीडित परिवार पर इससे मानो दुख और अपेक्षा का पहाड़ आ गिरा।परिवार मे अब गम और गुस्सा है।

 

डा. दीपेंद्र की तैनाती चित्रकूट में थी, पत्‍नी प्रयागराज में तैनात___ मूलरूप से कानपुर के घाटमपुर निवासी डा. दीपेंद्र सिंह की तैनाती चित्रकूट में थी। उनकी पत्नी डा. आभा सिंह की तैनाती प्रयागराज में है। परिवार अस्थायी रूप से यहीं अल्लापुर में रह रहा है। छोटे भाई हेमेंद्र सिंह दवा का व्यापार करते हैं। हेमेंद्र को इस बात पर काफी नाराजगी है कि उनके भाई की बीमारी को भी शासन ने नजरअंदाज किया। आरोप है कि तैनाती वाले जिले से लेकर लखनऊ तक अफसर पांच वर्ष से उनके पत्र को फाइलों में दबाते रहे।

 

डा. दीपेंद्र लिवर की बीमारी से पीडि़त थे____ डा. दीपेंद्र दो वर्ष पहले लिवर की बीमारी से पीडि़त हो गए थे। शासन की उपेक्षा से त्रस्त डा. दीपेंद्र ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में केस दायर कर वीआरएस का आदेश कराया। तब कुछ राहत मिली थी कि शायद अब उन्हें परिवार के पास रहकर उपचार कराने का मौका मिलेगा लेकिन शासन में बैठे अफसरों की उदासीनता भी दिखी। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। मामला अब वहां विचाराधीन है।

 

तबादले का आदेश आने पर हुए अवाक___ डा. दीपेंद्र की गुरुवार को तेरहवीं थी। परिवार दुख में रहा। शुक्रवार को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर उनका तबादला आदेश आ गया। तबादला हुआ चित्रकूट से मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय यानी काल्विन अस्पताल के लिए। परिवार में गम के साथ गुस्सा पनपने के लिए बस यही काफी था।

 

डाक्‍टर के भाई ने क्‍या कहा___ डा. दीपेंद्र के भाई हेमेंद्र कहते हैं कि सब खत्म हो गया, अब तबादला आदेश और इस संबंध में कुछ बात करके करेंगे भी क्या। उन्हें डर है कि मुखर होने से कहीं डा. दीपेंद्र की पेंशन जारी होने में कोई अड़चन न पैदा कर दे।