February 28, 2024

RTI कानून के संभावित दुष्प्रभावी संशोधन और झारखंड में सूचना आयोग की निष्क्रियता पर हजारीबाग में सेमिनार आयोजित-

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हजारीबाग ://(झारखंड)

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*RTI कानून के संभावित दुष्प्रभावी संशोधन और झारखंड में सूचना आयोग की निष्क्रियता पर हजारीबाग में सेमिनार आयोजित*

 

 

■ “सूचना का अधिकार” के मामलों को लेकर आयोजित दो दिवसीय 136वें राष्ट्रीय आर.टी.आई. वेबीनार में झारखंड के हजारीबाग में सूचना के अधिकार की रक्षा, संवर्धन और प्रचार-प्रसार विषय पर सेमिनार को ऑनलाइन वेबीनार से जोड़ते हुए 3 घंटे का कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसमें देश के जाने-माने आर.टी आई. कार्यकर्ताओं, सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्तियों और वर्तमान एवं पूर्व राज्य-सूचना आयुक्त सहित केंद्रीय सूचना-आयुक्त ने कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दी ।

 

*प्रस्तावित डेटा बिल का वर्तमान मसौदा आर.टी.आई. कानून के लिए घातक, सामान्य जानकारी मिलना भी होगा मुश्किल – निखिल डे*

 

■ मजदूर ,किसान शक्ति संगठन और एन.सी.पी.आर.आई. के सह-संस्थापक निखिल डे ने बताया कि यदि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल का प्रस्तावित मसौदा लागू होगा तो इससे आर.टी.आई. कानून में गलत ढंग से संशोधन किए जाने से सामान्य जानकारी मिलना मुश्किल हो जाएगा । उन्होंने सहभागियों के प्रश्नों का जवाब देते हुए सभी को अवगत कराया कि किस प्रकार राजस्थान में जन-सूचना पोर्टल के माध्यम से छोटी-छोटी जानकारियां हासिल कर भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है । उन्होंने स्लाइड प्रेजेंटेशन के माध्यम से दिखाया कि कैसे राजस्थान सरकार द्वारा जन-सूचना पोर्टल में सभी विभागों की सामान्य से लेकर सभी जानकारियां साझा की जा रही है । वो चाहे माइनिंग से संबंधित हो, खनिज संपदा के दोहन से संबंधित हो अथवा राशन या पेंशन की जानकारी हो , सभी कुछ आसानी से प्राप्त की जा सकती है । उन्होंने कहा कि यदि डेटा बिल का प्रस्तावित मसौदा लागू हो जाएगा तो धारा-4 के तहत यह सब जानकारी व्यक्तिगत जानकारी बताते हुए पोर्टल से हटा दी जाएंगी जिससे पारदर्शिता पर बड़ा आघात लगेगा ।

 

■ निखिल डे ने सभी देश के नागरिकों और आर.टी.आई. कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर डेटा बिल के प्रस्तावित प्रावधान से आर.टी.आई. कानून को प्रभावित करने वाले मसौदे को हटाए जाने का विरोध करने की बात की ।

 

*झारखंड की धरती से ही करें एक नए आंदोलन का आगाज । आर.टी.आई. कानून की रक्षा हमारा पहला उद्देश्य – अरुणा राय*

 

■ प्रसिद्ध समाजसेविका एवं मजदूर किसान शक्ति संगठन की सह-संस्थापक अरुणा राय ने कहा कि आर.टी.आई. कानून को अस्तित्व में लाने के लिए राजस्थान की धरती से आंदोलन चालू हुआ और किस प्रकार मजदूर किसान शक्ति संगठन से जुड़े हुए मजदूरों और किसानों ने इस आंदोलन को नई ऊर्जा दी थी । परंतु आज जब आर.टी.आई. कानून पर एक बार पुनः खतरा मंडरा रहा है और लोकतंत्र में पारदर्शिता के विरोधी तत्वों द्वारा आर टी.आई. कानून पर आघात लगाए जाने का प्रयास किया जा रहा है । ऐसे में झारखंड के हजारीबाग की धरती पर आयोजित इस सेमिनार से ही आर टी.आई. कानून को बचाने का संकल्प लेते हुए एक नया आंदोलन प्रारंभ किया जाए । उन्होंने निखिल डे, राहुल सिंह एवं उपस्थित प्रतिभागियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अब इसी प्रकार का एक बड़ा आंदोलन दिल्ली में किया जाना चाहिए और जन-समर्थन जुटाया जाना चाहिए तभी आर.टी.आई. कानून को बचाया जा सकेगा ।

 

*झारखंड में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति और सूचना आयोग के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनता को आगे आने की आवश्यकता – राहुल सिंह*

 

■ झारखंड में हजारीबाग में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के समापन दिवस 29 जनवरी 2023 को उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के वर्तमान राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि झारखंड राज्य में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति न होना एक चिंता का विषय है । उन्होंने कहा कि एक लंबे अर्से से वेबीनार के माध्यम से भी झारखंड क्षेत्र के जुड़ने वाले साथियों के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त होती रही है कि कैसे झारखंड के आम नागरिक सूचना प्राप्त करने के लिए परेशान हो रहे हैं क्योंकि वहां विधानसभा में विपक्षी दल का नेता न होने से मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं की जा सकी है । जिसकी वजह से सूचना आयोग क्रियाशील नहीं है । इस विषय पर राहुल सिंह ने कहा कि झारखंड की जनता को इसके लिए आगे आना पड़ेगा और मिलकर आवाज उठानी पड़ेगी । उन्होंने उपस्थित सहभागियों के प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा की प्रस्तावित डेटा बिल के माध्यम से आर.टी.आई. कानून के संशोधन से आर टी.आई. कानून लगभग समाप्त हो जाएगा । उन्होंने कहा कि कोर्ट के द्वारा दिए जा रहे निर्णय के विषय में भी चर्चा करनी चाहिए लेकिन हम सकारात्मक निर्णय पर भी केंद्रित करें ।

 

■ कार्यक्रम में वेबीनार के माध्यम से पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने भी अपने विचार रखे और स्लाइड शो प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तावित डेटा बिल से आर.टी.आई. कानून को होने वाली हानि के विषय में अपनी प्रस्तुति दी और बताया कि कैसे डेटा बिल की धारा 29(2) और 30(2) दोनों ही हटाई जानी आवश्यक है अन्यथा आर.टी.आई. कानून पूरी तरह से निष्प्रभावी हो जाएगा ।

 

■ कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप एवं “माहिती अधिकार मंच मुंबई” के संयोजक एवं वरिष्ठ आर.टी.आई. कार्यकर्ता भास्कर प्रभु ने भी अपने विचार रखे ।

 

■ झारखंड हजारीबाग से राष्ट्रीय सेमिनार का संयोजन वरिष्ठ आर.टी.आई. कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल, राजेश मिश्रा एवं छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल आदि के द्वारा किया गया जबकि वेबीनार का संयोजन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, वरिष्ठ पत्रिका समूह के पत्रकार मृगेंद्र सिंह एवं आर.टी.आई. रिवॉल्यूशनरी-ग्रुप के आई.टी. सेल के प्रमुख पवन दुबे के द्वारा किया गया ।

 

( सौजन्य :- सूचनाधिकार रक्षा मंच )

 

 

 

ब्यूरो रिपोर्ट,दुमका