मोदी सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के विलय का फैसला एक ऐतिहासिक गलती–इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन।
प्रयागराज 04 अप्रैल । 1 अप्रैल का दिन भारतीय बैंकिंग और उद्योग के लिए काला दिन करार
मोदी सरकार द्वारा छोटी बचतों पर ब्याज दरें कम करना कारपोरेट जगत की प्रभु भक्ति करार।
इंडियन एयरलाइंस व एयर इंडिया को मर्ज करते समय भी दी थी ऐसी ही दलीलें।
आज जब हमारा देश कोरोनावायरस नाम की महामारी से बुरी तरह से जूझ रहा है। पूरा देश मेडिकल आपातकाल और सामाजिक आर्थिक आपदा का सामना कर रहा है। देश के करोड़ों मजदूर भोजन व दवाइयों समेत सभी बुनियादी जरूरतों के लिए मारे मारे फिर रहे। प्रवासी मजदूर काम, छत या भोजन ना मिलने के कारण पैदल अपने पैतृक गांव लौटने को मजबूर हो रहे। जब देश का गरीब जीवन की बुनियादी सुविधाओं के लिए दरबदर ठोकरें खा रहा है। जब पूरे देश को एकजुट होकर करोना आपदा, देश के बने आर्थिक मंदी जैसे हालात से निपटने की जरूरत थी ऐसे समय मोदी सरकार द्वारा बेशर्मी के साथ 1अप्रैल से सार्वजनिक क्षेत्र की छह बैंकों के विलय का फैसला मंदभागा है। इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन इस फैसले का पुरजोर विरोध करती है।
प्रेस को बयान जारी करते हुए कामरेड मनोज पाण्डेय अध्यक्ष, एवं कामरेड सर्वजीत सिंह, महासचिव, इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन ने संयुक्त रूप से कहा कि आज जब मोदी सरकार को दुनिया भर से सीख लेते हुए देश में इस महामारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए ध्यान लगाने की जरूरत थी तो ऐसे समय भी मोदी सरकार को कारपोरेट जगत की भक्ति सूझ रही है। फेडरेशन के नेताओं ने कहा कि आज स्पेन जैसे देश अपने स्वास्थ्य ढांचे को निजी हाथों से लेकर उनका राष्ट्रीयकरण कर रहे हैं परंतु मोदी सरकार किस एजेंडे पर काम कर रही है यह साफ दिख रहा है। नेताओं ने याद दिलाया कि 15 जुलाई 2007 को जब इंडियन एयरलाइन व एयर इंडिया का विलय किया गया तब भी देश को इसी तरह के सपने दिखाए गए थे और नतीजा हमारे सामने है एयर इंडिया ना सिर्फ दिवालिया हो चुकी है बल्कि मोदी सरकार उसको निजी हाथों देने की पूरी तैयारी में है ऐसा ही बैंकों के साथ होना तय है।
फेडरेशन के नेताओं ने कहा के इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन का मानना है कि आज क्रोना संकट ने हमें फिर बहुत बड़ी सीख दी है कि संकट के समय सार्वजनिक क्षेत्र ही देश के काम आता है और निजी क्षेत्र हमेशा की तरह संकट में भी अपने मुनाफे की हवस अंधा होता है। आज मोदी सरकार को इतिहास से सबक लेते हुए देश के संसाधनों के राष्ट्रीयकरण की ओर बढ़ना चाहिए यही देश हित में सही कदम है। उन्होंने कहा के अब सरकार ने वित्तीय घाटा और असंतुलन को कम करने के नाम पर पीपीएफ और अन्य तमाम छोटी बचतों पर ब्याज दर घटाने का ऐलान किया है जो कि चौतरफा संकट में फंसे देश के आवाम को और अधिक संकट में डालेगा। दुखद बात है इस समय वरिष्ठ नागरिक दोहरी मार का शिकार हो रहें हैं एक तरफ करोना से सबसे बड़ा खतरा बुजुर्गों को है दूसरी तरफ मोदी सरकार उनकी बचतों पर ब्याज दरों में कटौती कर रही है। उन्होंने कहा इंडियन रेलवे इंप्लाइज फेडरेशन का मानना है यह कदम संकट में घिरे हुए हमारे देश को और संकट में डालेगा। जब देश के लोगों के पास या देश के पास बचत ही नहीं रहेगी तो इसका अंजाम क्या होगा यह किसी से छुपा हुआ नहीं। कामरेड मनोज पाण्डेय एवं कामरेड सर्वजीत सिंह ने संयुक्तरूप से जोर देते हुए कहा के इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन सरकार की पूंजीवादी नीतियों का पुरजोर विरोध करती है और रेलवे समेत किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण की किसी भी कोशिश का डटकर मुकाबला किया जाएगा।

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