सेना के नाम पर वोट मांगने वाली
केंद्र की मोदी सरकार भले ही ख़ुद को देश के सैनिकों और अर्द्ध सैनिकों का हितैशी बताती हो, लेकिन हक़ीकत यह है कि मोदी सरकार से BSF, ITBP, SSB, CISF और CRPF के अर्द्ध सैनिक ख़ुश नहीं। अर्द्ध सैनिकों ने अपनी कई मांगों को लेकर मोदी सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है।
दिल्ली के जंतर मंतर पर अर्द्ध सैनिकों ने पेंशन दोबारा शुरू करने, शहीद का दर्जा देने सहित अन्य मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान अर्द्ध सैनिकों ने केंद्र पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए मोदी सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि उनकी मांगों को घोषणा पत्र में शामिल करने वाली पार्टी को ही लोकसभा चुनाव में वोट देंगे।
कन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरा मिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से रविवार को धरना-प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में शामिल हुए अर्द्ध सैनिकों को आगे बढ़ने से पुलिस ने रोक लिया, लेकिन नारेबाजी का सिलसिला घंटों चलता रहा। एसोसिएशन के सदस्यों ने पुलवामा के शहीदों की याद में जंतर मंतर के पास मोमबत्तियां जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि देश के लिए खुद को समर्पित करने वाले जवानों को शहीद का दर्जा क्यों नहीं दिया जाता है। उन्होंने सेवा नियम लागू करने, पुरानी पेंशन व्यवस्था दोबारा बहाल करने सहित अन्य मांगें दोहराई।
एसोसिएशन ने सीसीएस रूल्स में बदलाव कर पैरा मिलिट्री रूल्स बनाने, सीपीसी कैंटीन में जीएसटी में 50 फीसदी छूट, सेना की तर्ज पर वेतन भत्ते, पेंशन की मांगें पूरी न करने का सरकार पर आरोप लगाते हुए निशाना साधा। कहा कि अर्द्ध सैनिकों को मिलने वाली पेंशन 2004 से बंद कर दी गई, जिससे उनकी परेशानी कई गुना बढ़ गई हैं।
प्रदर्शन में शामिल एक पूर्व अर्द्ध सैनिक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके साथ दिवाली तो मनाते हैं, लेकिन उनके लिए कुछ करते नहीं। प्रदर्शनकारी ने सवाल करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने अर्द्ध सैनिकों के लिए क्या किया है?
साभार

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