जागी ममता तो वृद्ध मां को बेटा ले गया घर, बेटे-बहू की प्रताड़ना पर राजस्थान से कौशांबी पहुंची थी कस्तूरी-
प्रयागराज- यह एक वृद्धा किस्तूरी की दास्तां है। वह राजस्थान की रहने वाली हैं। बेटे और बहू की प्रताड़ना से त्रस्त होकर घर छोड़ दिया। भटकते हुए वह कौशांबी पहुंच गईं। जानकारी मिलने पर वृद्धाश्रम संचालक उन्हें आश्रम लाए और उनके पुत्रों को सूचना दी। कुछ दिन तो उन्हाेंने ध्यान नहीं दिया। जब 10 दिन बीत गया तो उन्हें मां की चिन्हा हुई और बुजुर्ग के घर में रहने के मायने समझ में आए। पुत्र यहां आया और लंबी पंचायत के बाद वृद्धा बेटे के साथ जाने को राजी हो गई। वे लिवाकर वापस राजस्थान चले गए।
भटकते हुए कौशांबी के भरवारी रेलवे स्टेशन पहुंची थीं : नवासिटी, नागौर राजस्थान की रहने वाली किस्तूरी पत्नी छीगनलाल की मार्मिक कहानी है। उनके पांच बेटे व बहुए हैं। उनकी प्रताड़ना के कारण वे घर छोड़कर चली गईं लेकिन किसी ने खोजबीन नहीं की। भटकते हुए वह कौशांबी के भरवारी रेलवे स्टेशन पर पहुंच गईं। इसकी जानकारी लोगों ने वृद्धाश्रम संचालक आलोक राय को दी। वह कस्तूरी को वृद्धा आश्रम ले गए।
मां को मनाकर साथ ले गया बेटा : किस्तूरी के कौशांबी में होने की जानकारी महिला के छोटे बेटे गोर्धन कुमावत को हुई। करीब 10 दिनों की दूरी ने बेटे को मां प्रति लगाव पैदा कर दिया। वह मां को लेने के लिए अपने कुछ साथियों के साथ कौशांबी के वृद्धाश्रम पहुंचा। मां को देखते ही बेटा रोने लगा। वह मां को साथ ले जाने की जिद करते हुए आश्रम संचालत समेत अन्य से विनती करने लगा। कहा गया कि बिना किस्तूरी की सहमति के उन्हें आश्रम से भेजा नहीं भेजा जा सकता। कई घंटे की पंचायत के बाद मां बेटे के साथ जाने को राजी हो गई। किस्तूरी बेटे गोर्धन कुमावत के साथ राजस्थान के लिए रवाना हो गईं। आश्रम संचालक आलोक राय ने बताया कि आश्रम में किसी को उसकी मर्जी के बिना नहीं रख सकते। ऐसे में वृद्धा की इच्छा पर उसे बेटे के साथ जाने दिया गया।

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