April 16, 2026

प्रयागराज में फर्जी ईएफटी से रेल यात्रियों को ठगता था टीटीई; जालसाजी करते RPF ने पकड़ा

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प्रयागराज: ट्रेन में यात्रियों का फर्जी एक्सेस फेयर टिकट (ईएफटी) बनाकर रेलवे को चूना लगाने वाले टीटीई को बर्खास्त कर दिया गया है। वह चार साल पहले फर्जी ईएफटी बनाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। उस दौरान जेल भी गया था। जेल से रिहा होने पर बहाल हो गया था लेकिन रेलवे में केस चलता रहा। आरोप सही पाए जाने पर अब वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) ने उसे बर्खास्त कर दिया है।

जौनपुर में मडियाहू निवासी प्रदीप मौर्या रेलवे में चतुर्थ श्रेणी में भर्ती हुआ था। बाद में प्रमोशन पाकर टीटीई बन गया। टीटीई बनने के बाद उसने फर्जीवाड़ा शुरू किया। उन्होंने ईएफटी बुक छपवायी और यात्रियों से वसूली शुरू कर दी। वह अक्सर गाजीपुर-बांद्रा ट्रेन में फर्जी ईएफटी काटता था। वह गाजीपुर से ट्रेन में चढ़ता और प्रयागराज तक आता। इस ट्रेन में भीड़ खूब रहती है और तमाम लोग जनरल का टिकट लेकर स्लीपर कोच में चढ़ जाते थे। ऐसे ही यात्रियों का प्रदीप मौर्या ईएफटी काटकर अवैध वसूली करता था। 2018 में यह मामला आगरा डिवीजन में पकड़ा गया। वहां पर यात्रियों की चेकिंग में पता चला कि जो ईएफटी काटी गई है, वह फर्जी है।

यात्रियों से गाजीपुर और प्रयागराज के बीच वह टिकट काटे गए थे। इसलिए रेलवे के अधिकारियों और आरपीएफ की टीम ने गाजीपुर से प्रयागराज के बीच जांच शुरू की। जांच में प्रदीप मौर्या रंगे हाथों पकड़ा गया। उनके खिलाफ जीआरपी में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। जेल से रिहाई के बाद वह बहाल हो गया। इसी बीच उसके मामले की जांच हुई तो आरोपों की पुष्टि हो गई। अब सीनियर डीसीएम ने उसे बर्खास्त कर दिया है।

सभी टीटीई को ईएफटी मिलती है। इसका उपयोग वह बिना टिकट यात्रियों और जनरल का टिकट लेकर स्लीपर या एसी कोच में बैठे यात्रियों का बढ़े हुए किराए पर टिकट काटने के लिए करते हैं। इसे कोई टीटीई अपने से नहीं छपवा सकता है। वह जितने का टिकट काटेंगे, उसका पैसा रेलवे में जमा करना होता है। लेकिन प्रदीप मौर्या ने इसे फर्जी छपवाकर अवैध रूप से यात्रियों से वसूली की थी।