November 6, 2026

प्रयागराज के बीएसए प्रवीण तिवारी की सत्यनिष्ठा संदिग्ध*

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*प्रयागराज के बीएसए प्रवीण तिवारी की सत्यनिष्ठा संदिग्ध*

आप सभी अवगत हैं कि, प्रयागराज के बहरिया विकासखण्ड के कम्पोजिट विद्यालय सरायख्वाजा के शिक्षक अजीत यादव ने इलाहाबाद शहर उत्तरी विधानसभा के प्रत्यासी की जनसभा में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की तुलना सांड से की तथा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लंगोट की जांच कराने की बात कही, जिसका वीडियो सोशल मीडिया (व्हाट्सअप) पर बहुत अधिक वायरल हुआ है। यह वीडियो जनपद प्रयागराज में मतदान के दिनांक 27 फरवरी से पूर्व चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत का है।

प्रयागराज के बीएसए प्रवीण की जानकारी में उक्त विवादित वीडियो के होने के बावजूद उक्त शिक्षक अजीत यादव के निलंबन के लिये वह मतगणना की तिथि 10 मार्च तक इसलिये इंतजार करते रहे क्योंकि उनको यह भय था कि यदि सरकार समाजवादी पार्टी की बनती है तो उनको लेने के देने पड़ जाएंगे। जब मतगणना की तिथि 10 मार्च बीत गयी और बीएसए प्रवीण को फिर से योगी आदित्यनाथ जी को दुबारा मुख्यमंत्री बन जाने की सुगबुगाहट सुनाई पड़ी तब जाकर मतगणना के अगले दिन 11 मार्च को उन्होंने अजीत यादव के निलंबन की खानापूर्ति कर दी।

बीएसए प्रवीण द्वारा 11 मार्च को जारी किए गए निलंबन पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ जी पर प्रयागराज के इलाहाबाद शहर उत्तरी विधानसभा के प्रत्यासी की जनसभा में वीडियो के माध्यम से बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी -प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की तुलना सांड से करना तथा मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के लंगोट की जांच करवाने का, बीएसए प्रवीण द्वारा निलंबन पत्र में न तो स्पष्ट उल्लेख किया गया और न ही निलंबन पत्र में उक्त शिक्षक ने अध्यापक आचरण सेवा नियमावली के किस पैरा/बिंदु का उल्लंघन किया है, उसी का उल्लेख है।

बीएसए प्रवीण द्वारा जारी निलंबन पत्र में जानबूझकर किये गए इन कमियों की वजह से उक्त शिक्षक अजीत यादव को जांच में सीधे-सीधे लाभ पहुँच सकता है।

यहां यह भी प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि, विधानसभा सामान्य निर्वाचन 2022 की चुनाव प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचार संहिता के प्रभावी रहते हुए भी अजीत यादव सरकारी शिक्षक होने के बावजूद लगातार चुनाव प्रचार करते रहे और बीएसए प्रवीण को कुछ भी नहीं पता जबकि वीडियो वायरल होने के बाद भी दिनांक 4 मार्च को बीएसए प्रवीण विकासखण्ड बहरिया के निरीक्षण पर गए भी थे।

अजीत यादव द्वारा स्वयं अपने फेसबुक पर पोस्ट के माध्यम से विधानसभा निर्वाचन 2022 में लगातार उत्तरप्रदेश के विभिन्न विधानसभाओं में चुनाव प्रचार करने की जानकारी दी गयी है। अजीत यादव द्वारा स्वयं किये गए फेसबुक पोस्ट से यह भी प्रतीत होता है कि, अजीत यादव कभी विद्यालय नहीं जाते तो क्या ऐसी परिस्थिति में उनका वेतन नियमित रूप से उनके बैंक खाते में आ रहा है, यह भी जांच का विषय है। इसके लिये बहरिया विकासखण्ड के खंड शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र मौर्य के कार्यप्रणाली की भी जांच होनी चाहिए क्योंकि वह विकासखण्ड बहरिया के निरीक्षण अधिकारी हैं।

इसप्रकार स्पष्ट है कि, अजीत यादव को अधिकारियों का मजबूत संरक्षण प्राप्त है।

विश्वस्त सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि, बीएसए प्रवीण ने जिस जांच अधिकारी / खंड शिक्षा अधिकारी विकासखण्ड कौड़िहार ओम प्रकाश मिश्र को निलंबन प्रकरण की जांच में नामित किया है, उन्हें वह विवादित वीडियो भी उपलब्ध नहीं कराया है जबकि बीएसए प्रवीण के पास वह वायरल वीडियो मौजूद है।

इस प्रकरण के सम्यक अनुशीलन से बीएसए प्रयागराज प्रवीण तिवारी की सत्यनिष्ठा संदेह के दायरे में है। अतः इन्हें तत्काल जनपद प्रयागराज से अन्यत्र स्थानांतरित किया जाना अति आवश्यक हो गया है अन्यथा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश योगी आदित्यनाथ जी से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में लीपा-पोती की अत्यधिक संभावना लगातार बनी हुई है।