November 3, 2026

फ्लैग- जमीं खा गई आसमाँ कैसे-कैसे तहज़ीब, ईमानदारी और इंसानियत की मिसाल थे कमाल खान- अमित कुमार प्रजापति

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*फ्लैग- जमीं खा गई आसमाँ कैसे-कैसे तहज़ीब, ईमानदारी और इंसानियत की मिसाल थे कमाल खान*

 

*जैसे वो कैमरे पर होते थे, वैसे ही हक़ीक़त में भी- राजेश माहेश्वरी*

 

*फतेहपुर के पत्रकारों ने दो मिनट का मौनव्रत रखकर दी श्रद्धांजलि*

 

*दोआबा-सम्राट खागा फतेहपुर//* कमाल की रिपोर्टिंग, कमाल उन बेहद कम पत्रकारों में से एक रहे जो सीनियर होने के बावजूद फ़ील्ड में जाते रहे, रिपोर्टिंग करते रहे। रिपोर्टिंग ही उनकी ताक़त थी। वो जिस विषय पर रिपोर्टिंग करते उस पर किताबें पढ़ा करते थे। उनके कैमरामैन ने एक बार मुझे बताया कि उनकी शूटिंग की गाड़ी में किताबें रखी होतीं हैं। कमाल का ज्ञान, विषय पर पकड़, भाषा शैली, तहज़ीब और लखनवी नज़ाकत, कमाल जब स्क्रीन पर आते तो बड़े-बड़े एंकर्स उनके सामने बौने दिखने लगते थे। पीढ़ियाँ याद करेंगी एक कमाल का पत्रकार था कमाल ख़ान। पत्रकारिता के आसमान का सबसे चमकता सितारा टूटकर गिर गया है। पत्रकारिता का आसमान आज ख़ाली हो गया। अब न कमाल रहे न कमाल का वो लखनऊ। इंसानियत से लबरेज़ पत्रकारिता के लिये, आपका शुक्रिया कमाल ख़ान। आप हमेशा याद आयेंगे। अलविदा!

उक्त बातें वरिष्ठ पत्रकार/लखनऊ मुख्यालय से मान्यता प्राप्त राजेश माहेश्वरी ने दिवंगत कमाल खान के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए बातचीत के दौरान दोआबा सम्राट से कहीं। उन्होने वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान के असामयिक अवसान पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए बताया कि एनडीटीवी में लम्बे समय से कार्यरत कमाल खान का आज सुबह हार्ट अटैक पड़ने से निधन हो गया। श्री खान की गिनती देश के श्रेष्ठ पत्रकारों में होती रही है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की दीर्घकाल तक सेवा करने के पूर्व उन्होंने नवभारत टाइम्स, अमृत प्रभात और दैनिक जागरण जैसे समाचार पत्रों में भी अपनी सेवाएं दीं थीं। एनडीटीवी में उनकी विशिष्ट शैली की रिपोर्टिंग और पैनी टिप्पणियों के लाखों लोग कायल थे।

उधर फतेहपुर जनपद में भी कमाल खान के आकस्मिक निधन पर शोक सभा का आयोजन पत्थरकटा चौराहा स्थित नवीन मार्केट स्थित एक समाचार पत्र कार्यालय/यूपीडब्यूजेयू के कैम्प कार्यालय में किया गया। शोक सभा को सम्बोधित करते हुए यूपीडब्यूजेयू के प्रदेश महासचिव राजेश माहेश्वरी ने दिवंगत खान के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बेबाक आवाज एवं लेखनी के धनी कमाल खान का नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में जीवन पर्यन्त बड़े आदर के साथ लिया जाएगा। उन्होने बताया कि सम्पूर्ण जीवन पीत पत्रकारिता से दूर रहकर समाज की भलाई व सरकारों की अच्छी-बुरी नीतियों का खुलकर बखान करने वाले निष्पक्ष पत्रकार की छवि हासिल करने वाले कमाल खान हमेशा अपने से जूनियर पत्रकारों की हौसला आफजाई करते रहते थे और हमेशा समझाते थे कि पत्रकारिता एक पेशा नही मिशन है जिसे पूरी लगन व निष्ठा के साथ करना चाहिए। शोक सभा के दौरान श्री माहेश्वरी के अलावा वरिष्ठ पत्रकार शकील अहमद सिद्दीकी, नीतेश श्रीवास्तव, विकास त्रिवेदी राहुल, रामचन्द्र सैनी, संदीप केशरवानी, मनीष पाल, उमेश चन्द्रा, सूर्यसेन त्रिवेदी, हरिओम श्रीवास्तव, परमानन्द पाण्डेय, मेराजउद्दीन, रिजवानउद्दीन, मुकीम अहमद, अजहरउद्दीन, रवि कश्यप, बब्लू लोधी, जमाल अयूब कोटी, हरीश पाल, शादाब मंसूरी, प्रशान्त सैनी आदि ने दो मिनट का मौनव्रत रखकर दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की//