*LEGAL Update*
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*सुप्रीम कोर्ट तारीख पर तारीख देने से बेहद नाराज कहा, कोर्ट द्वारा टालमटोल से हम पर अनावश्यक बोझ*
⚫कोर्ट द्वारा ‘तारीख पे तारीख’ देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद नाराजगी जताई है। कोर्ट ने माना है कि मामलों के टालमटोल करने से उस पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है क्योंकि उसने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है जिसकी अग्रिम जमानत याचिका पिछले सात महीनों से इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष लंबित है।
🟤 *इस मामले में जस्टिस एस के कौल और जस्टिस एम एम सुंदरेश की पीठ ने यह कहते हुए राहत दी* कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसके समक्ष लंबित अग्रिम जमानत याचिका पर अभी तक कोई विचार विमर्श नहीं किया है। न्यायाधीशों ने कहा कि हम मानते हैं कि इस तरह की टालमटोल से हम पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है।
🔵पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को जांच के दौरान कभी अरेस्ट नहीं किया गया था, हालांकि उसने जांच में सहयोग किया। ऐसे में, आरोप पत्र दाखिल होने पर, याचिकाकर्ता को अरेस्ट करने और उसे कोर्ट के समक्ष पेश करने की कोई जरूरत नहीं है। कानूनी स्थिति को अब हमने स्पष्ट कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत की मांग करने वाले एक आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
🟢सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम ट्रायल कोर्ट के समक्ष सुनवाई की अगली तारीख तक याचिकाकर्ता को अरेस्ट के विरूद्ध अंतरिम संरक्षण प्रदान करते हैं और सीआरपीसी की धारा 82 (फरार व्यक्ति के लिए उद्घोषणा) के तहत 3 अगस्त, 2021 के आदेश के संचालन पर रोक लगाते हैं। लोअर कोर्ट के समक्ष पेश होने वाले याचिकाकर्ता के साथ कानून के मुताबिक निपटा जाएगा।

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