June 22, 2026

भ्रष्टाचार से शामिल 470 लोक सेवकों के विरूद्ध सतर्कता अधिष्ठान द्वारा मा0 न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल – अजय मिश्रा

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पत्र सूचना शाखा

(मीडिया सेल, गृह विभाग)

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0

 

भ्रष्टाचार से शामिल 470 लोक सेवकों के विरूद्ध

सतर्कता अधिष्ठान द्वारा मा0 न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल

 

लखनऊः 09 सितम्बर, 2021

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश पर भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टाॅलरेंस की नीति पर कार्यवाही करते हुए सतर्कता अधिष्ठान द्वारा उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की गयी हैं।

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक सतर्कता अधिष्ठान द्वारा भ्रष्टाचार से संबंधित 207 मामलों में 470 लोक सेवको के विरूद्ध मा0 न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किये गये है।

उल्लेखनीय है कि सतर्कता अधिष्ठान द्वारा भ्रष्टाचार से संबंधित 142 मामलों में विभागीय कार्यवाही, 202 में अभियोजन, 10 प्रकरणों में लघु दण्ड/वृहद दण्ड तथा 07 प्रकरणों में क्षति वसूली संबंधी कार्यवाही की गयी है।

अपर मुख्य सचिव, गृह, श्री अवनीश कुमार अवस्थी ने उक्त जानकारी देते हुये आज यहाॅ बताया कि शासन द्वारा सतर्कता अधिष्ठान की कार्य प्रणाली को और अधिक चुस्त-दुरूस्त बनाये जाने के उद्देश्य से दस सेक्टरों क्रमशः लखनऊ, मेरठ, बरेली, आगरा, अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, झाॅसी व कानपुर में सतर्कता अधिष्ठान के थाने भी खोले गये हैं।

सर्तकता अधिष्ठान मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सतर्कता अधिष्ठान को शासन द्वारा लगभग साढ़े चार वर्ष की अवधि में 1156 जाॅचें आदेशित की गयी। इनमें से 267 अन्वेषण, 497 खुली जाॅच, 168 गोपनीय जाॅच, 169 प्रकरणों में गोइन्ट(अभिसूचना संकलन) तथा 55 मामलों में ट्रैप की कार्यवाही की गयी। इस अवधि में हुई जाँच के तहत 322 मामलों में आरोप सिद्ध न होने के कारण उन्हे समाप्त किया गया है।

उक्त अवधि में सतर्कता अधिष्ठान द्वारा निर्णीत मामलों की कुल संख्या-110 रही, जिनमें से 40 मामलों में सजा की कार्यवाही की गयी है।

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सम्पर्क- दिनेश कुमार सिंह, सूचनाधिकारी

[09/09, 5:27 pm] Vipin Mishra Cug: पत्र सूचना शाखा

(मीडिया सेल, गृह विभाग)

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0

 

धारा-107/116/151 के तहत अवैध रूप से हिरासत पाये जाने पर पीड़ित व्यक्ति को मिलेगा 25 हजार रूपये मुआवजा

 

अवैध हिरासत किये जाने के उत्तरदायी अधिकारी के

विरूद्ध भी होगी नियमानुसार दण्डात्मक कार्यवाही

 

उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के निर्देशों के क्रम शासन द्वारा दिये गये जरूरी दिशा-निर्देश

 

लखनऊः 09 सितम्बर, 2021

 

परिशांति कायम रखने के उद्देश्य से दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अधीन धारा-107/116/151 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट को प्राप्त शक्तियों के क्रियान्वयन के विषय में शासन द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं।

यह निर्णय माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के निर्देशों के क्रम में लिया गया है, जिसमें इस विषय पर एक उचित कार्य प्रणाली(डमबींदपेउ) विकसित किये जाने हेतु यथोचित् दिशा-निर्देश निर्गत किये जाने की अपेक्षा की गयी है।

इस क्रम में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों सहित पुलिस महानिदेशक, समस्त जोनल, अपर पुलिस महानिदेशक, समस्त परिक्षेत्रीय महानिरीक्षक/उप महानिरीक्षक एवं समस्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, उ0प्र0 को शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं।

निर्देशों में शासन द्वारा समस्त जिला मजिस्ट्रेट, उसके अधीनस्थ समस्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट्स तथा विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट्स से यह अपेक्षा की गयी है कि दण्ड प्रक्रिया संहिता में उन्हें प्रदत्त की गयी शक्तियां, उनके क्षेत्राधिकार में शांति व्यवस्था एवं लोक प्रशान्ति बनाये रखने के लिए हैं। शासन द्वारा कहा गया है कि इनका पालन सदैव गुण दोष के आधार पर युक्ति-युक्त न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग करते हुये, विधि एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाय, ताकि आम जन को संविधान से प्राप्त मौलिक अधिकार संरक्षित रहे।

शासन द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति की अवैध रूप से हिरासत प्रमाणित पायी जाती है, तो पीड़ित व्यक्ति को 25 हजार रूपये की धनराशि का भुगतान मुआवजे के रूप में किया जायेगा। इसके साथ ही अवैध हिरासत किये जाने के उत्तरदायी अधिकारी के विरूद्ध भी नियमानुसार दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।

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सम्पर्क- दिनेश कुमार सिंह, सूचनाधिकारी