जय भारत मंच के भारतीय संविधान जागृति सभा द्वारा भारतीय संविधान को जन्म भाषा में प्रत्येक भारतीय तक पहुंचाना बहुत जरूरी है इस विषय को लेकर भारतीय संविधान की जो आत्मा है वह भारतीय संविधान की प्रस्तावना है ।
इस विषय पर जोर दिया गया है कि भारतीय संविधान के प्रस्तावना में पांच प्रकार के सद्भाव हैं। बंधुता, समता, स्वाधीनता, न्याय और समप्रभुता !
बंधुता : बंधुता का मतलब है कि भारतीय जितने भी हैं उनमें आपस में शत्रुता नहीं होगी पहले सभी भारतीय अपने आप को एक परिवार माने य उनकी चेतना का प्रथम चरण होगा फिर दूसरे चरण में व पूरे विश्व वह सभी प्राणियों को एक आत्मा मानना शुरू कर देंगे जिस तरह का व्यवहार वह अपने लिए चाहते हैं उसी तरह का व्यवहार वह दूसरों के साथ भी करने लगेंगे चारों ओर मंगल होगा और मंगल होने के कारण से तृप्ति होगी तृप्ति होने के कारण से सर्वत्र शांति होगी ।
समता :- समता का मतलब है की हम समाज में ऐसी लोक शिक्षा करें जो प्रत्येक भारतीय को पढ़ाती हो उसका जिसमें मंगल हो यानी जो उसका हक हो वह उसे अवश्य मिले यह अपना है वह पराया है ऐसा भाव बंधुता को समाप्त करता है हम इस अपराध से बचें किसी को छोटा ना समझे लेकिन पहले खुद भी तो ज्ञानी बनना पड़ेगा ईश्वर ने हमें कर्तव्य दिए हैं कर्तव्यों की पूर्ति के लिए अधिकार दिए हैं कर्तव्य पूरा करने को हम धर्म भी कहते हैं जैसे राजा का धर्म पिता का धर्म पत्नी का धर्म मां का धरमपुत्र का धर्म यानी इन सब के कर्तव्य जब यह अपने कर्तव्य पूरा करते हैं तभी यह इस नाम से संबोधित किए जा सकते हैं जो इन कर्तव्यों को पूरा नहीं करता वह अधर्मी कहलाता है अपने कर्तव्यों को पूरा करने के कारण ही धर्मो रक्षति रक्षिता सर्व व्यापक उद्घोष सब को अपनी ओर आकर्षित करता है, जन्म से हमें कर्तव्य मिले कर्म करने से अधिकार मिले जो करता है अधिकार उसको मिले!
स्वाधीनता : स्वाधीनता यानी हम भी गुलाम नहीं बने और किसी को भी गुलाम ना बनाएं जो हमारी इंद्रियां हैं यह हमारे विवेक के अनुसार कार्य करें क्योंकि हमें खुद अपने स्तर पर पहले स्वाधीन होना है!
न्याय : न्याय क्या है जानने से पहले अन्याय को जानना पड़ेगा अन्याय दो प्रकार का है एक वह अन्याय है जो दिखाई देता है जैसे आतंक है भ्रष्टाचार है हत्या बलात्कार आदि आदि यह अन्याय दिखने वाला अन्याय है अदृश्य अन्याय जो नहीं दिखता समाज व सरकार में जो गलत लोग बैठे हैं वह पांच प्रकार की गलतियां करते हैं धोखा, लापरवाही, रिश्वत भाई भतीजावाद और अगर सामने स्त्री आती जाती है तो अस्मत खोरी ये अदृश्य प्रकार की अन्याय की नीति हैं यह अधिकार प्राप्त लोगों के द्वारा की जा रही है दृश्य अन्याय और अदृश्य से अन्याय दोनों प्रकार के अन्याय को हटाना है धीरे धीरे खत्म करना है पूरी तरह से मिटा देना है समाज में कोई किसी प्रकार का अन्याय ना रहे और न कोई कर पाये।
संप्रभुता : संप्रभुता का अर्थ है सर्वार्थ निरअपराध रहने की स्थिति भारतीय संविधान की इन पांच प्रस्तावनाओं को समझने की और जीवन में भी उतारने की आवश्यकता है तभी भारत और भारतीय पूंनः अपने देश भारत को विश्व गुरु के स्थान पर और सर्वथा अपनी आत्मा को श्रेष्ठता के भाव से देख पाएगा भारतीय होने की सार्थकता को निभा पाएगा जैसे महाभारत के समय तक भारत चक्रवर्ती राजा था और पूरे विश्व का नेतृत्व कर शांति रखता था सब की उन्नति करवाता था वही स्थिति दोबारा से इन सब कामों को करने से अपने आप आएगी और हम एक अच्छे नागरिक बन पाएंगे हमारे देश की सब और की सीमाएं वह लगभग 15000 किलोमीटर से अधिक है समुंदरी और स्थलीय सीमाएं और भारतीय नागरिक सुरक्षित महसूस करें सब प्रकार से सुरक्षित महसूस करें यही संप्रभुता है प्रत्येक भारतीय के प्रति कोई भी किसी भी प्रकार का अपराध ना कर सके चाहे वह देश का नागरिक हो चाहे वह विश्व में कहीं का भी नागरिक हो यह जय भारत मंच का लक्ष्य है हम सब कार्यकर्ता इसे जरूर हासिल करें इसके लिए निरंतर प्रयास करें इस लक्ष्य को हासिल करके हम भारत में अच्छी तरीके से रह सकते हैं और अपनी दुनिया को ठीक कर सकते हैं ! पुष्पराज तिवारी राष्ट्रीय महामंत्री जय भारत मंच

More Stories
Temukan Link Alternatif QQ88 Gampang Menang Maxwin Setiap Hari Tanpa Ribet
Sinar88 Login Link Alternatif Terbaru 2026 Pasti Anti Navigasi Net
In the Age of information, Specializing in Phising Kontol