आज भी जेल के अंदर से चलती है सत्ता, बृजेश, मुख्तार, अतीक भी करते हैं सम्मान
वाराणसी. यूपी के बाहुबली व माफियाओं की लिस्ट बहुत लंबी है। प्रदेश में बहुत कम ही ऐसे माफिया होंगे, जिन्होंने लंबे समय तक अपनी सत्ता चलायी है। ऐसे ही एक माफिया का नाम बाबा जी है, जिन्हें एक समय यूपी का सबसे बड़ा माफिया माना जाता था। बाबा जी से माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम ने जुर्म करने का तरीका सीखा था लेकिन मुम्बई में 1992 में हुए ब्लास्ट के बाद बाबा जी ने दाउद का साथ छोड़ कर छोटा राजन के गैंग में शामिल हो गये थे।
बनारस के फूलपुर थाना के मंगारी निवासी सुभाष ठाकुर उर्फ ‘बाबा’ जी की जरायम दुनिया की कहानी बेहद दिलचस्प है। मुम्बई में रहने के दौरान सुभाष ठाकुर जरायम की दुनिया से जुड़ गये। जरायम की दुनिया में सुभाष ठाकुर का दबदबा होता गया। मुम्बई में उसी समय दाऊद इब्राहिम भी अपराध की दुनिया में उतरा था। सुभाष ठाकुर के सम्पर्क में आने के बाद दाऊद इब्राहिम ने जुर्म करने का तरीका सीखा और डॉन बन गया। यूपी में इस समय तक माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह का भी जरायम की दुनिया में उदय हो चुका था। सुभाष ठाकुर से जुडऩे के बाद बृजेश सिंह की ताकत बढ़ती गयी। एक समय ऐसा भी आया कि बृजेश व सुभाष ठाकुर दोनों मिल कर काम करने लगे।
मुम्बई में पहली बार एक साथ गरजी थी AK-47 व 9एमएम की पिस्तौल, दाउद के बहनोई को मौत देने वालों से लिया था बदला
एक साथ ऐसा था कि सुभाष ठाकुर व छोटा राजन मिल कर दाऊद इब्राहिम के साथ काम करने लगे थे। 26 जुलाई 1992 को मुम्बई के नागपाड़ा के अरब गली में गवली गिरोह के शूटरों ने दाऊद इब्राहिम के बहनोई इस्माइल पारकर की जिम्मेदारी छोटा राजन को सौंपी गयी थी। 12 सितम्बर 19921 को सुभाष ठाकुर, बृजेश सिंह, बच्ची पांडेय, श्याम गरिकापट्टी समेत 24 शूटरों पर कड़ी सुरक्षा में मुम्बई के जेजे अस्पताल में इलाज करा रहे गावली के शूटर शैलेश की हत्या कर दाऊद का बदला लिया गया था। मुम्बई में पहली बार किसी की हत्या के लिए एक साथ AK-47 व 9 एमएम की पिस्तौल चलायी गयी थी। माना जाता था कि 500 राउंड गोली चलायी गयी थी। फायरिंग में गावली के शूटर, दो पुलिसकर्मी समेत कुल 10 लोगों की मौत हुई थी। सुभाष ठाकुर व दाऊद की दोस्ती में उस समय दरार पड़ गयी थी जब मुम्बई बम विस्फोट में दाऊद इब्राहिम का नाम सामने आ गया था इसके बाद से छोटा राजन व सुभाष ठाकुर से पहले दाऊद से दूरी बनायी। इसके बाद दाऊद इब्राहिम के जानी दुश्मन भी बन बैठे हैं। जेजे अस्पताल मर्डर में टाडा कोर्ट ने सुभाष ठाकुर को मौत की सजा सुनायी थी जबकि बृजेश सिंह को बरी कर दिया था। बाद में सुभाष ठाकुर की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।
जेल में लगता है दरबार, मुम्बई से लेकर यूपी तक फैला है कारोबार
सुभाष ठाकुर इस समय फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद है। आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद सुभाष ठाकुर बाबा बन गया है। लंबी दाढ़ी व बाल अब सुभाष ठाकुर की पहचान बन चुकी है लोग उन्हें अब बाबा जी कहते हैं। जरायम दुनिया की सूत्रों की माने तो आज भी जेल के अंदर सुभाष ठाकुर का दरबार लगता है। जेल अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक दरबार में उपस्थित होते हैं। यूपी से लेकर मुम्बई तक में सुभाष ठाकुर का कारोबार फैला हुआ है जिसे कोई माफिया चुनौती नहीं देता है। बाहुबली मुख्तार अंसारी से लेकर अतीक अहमद तक सुभाष ठाकुर से अदावत नहीं लेना चाहते हैं। बागपत जेल में मारा गया मुन्ना बजरंगी भी सुभाष ठाकुर के आगे सिर झुकाता था।
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