लखनऊ मे एक-एक सांस का संघर्ष है। कोरोना मरीज तड़प रहे है। हर आती हुई एक सांस जीवन की उम्मीद जगाती है। लखनऊ असहाय और लाचार है। एक सामान्य बेड तक उपलब्ध नही। वरिष्ठ पत्रकार सच्चे भाई तड़प कर मर गए। कोई किसी को पूछने वाला नही। जिन्हे व्यवस्था संभालनी है वो घरों मे मुंह छिपाए बैठे है
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