
वाराणसी. एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने खुलासा किया है कि रोहित नगर कॉलोनी में एक प्लाट के मलबे में मिले शिवलिंग काशी विश्वनाथ कॉरीडोर के नहीं है। दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के गणेश महल स्थित एक मकान के पास के हैं। मकान के पास जर्जर मंदिर के बरामदा था जिसकी छत गिर गयी थी और उसी बरामदे के मलबे को रोहित नगर में फेंका गया था।
एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि १९ दिसम्बर को लंका थाना क्षेत्र के अस्सी नाले के पास रोहित नगर कॉलोनी में भन्टू उर्फ विजय कुमार यादव का प्लाट है। यहां पर मलबा डालने का काम हो रहा था। मलबे में कुछ टूटे हुए शिवलिंग मिले थे जिसको लेकर स्थानीय जनता ने लंका थाने में तहरीर दी है। पुलिस ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ही मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। एसपी सिटी दिनेश सिंह व एसपी क्राइम ज्ञानेन्द्र प्रसाद की टीम ने मलबा भरने वाले ठेकेदार व ट्रैक्टर मालिकों से पूछताछ शुरू की थी। जानकारी हुई कि भन्टू यादव ने मलबा डालने का ठेका बजरडीहा निवासी सैफ अली को दिया था। सैफ अली ने इस काम की जिम्मेदारी नानक और इम्तियाज दो ट्रैक्टर मालिक को दी थी। पुलिस ने दोनों से ही पूछताछ किया तो पता चला कि गणेश महाल से उन्होंने मलबा उठाया था। पुलिस जब दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के गणेश महाल पहुंची तो वहां पर नगर निगक के राजेश चन्द्र मिश्रा का आवास था। आवास के पास ही बहुत जर्जर शिव मंदिर व बरामदा था जिसकी छत गिर गयी थी। मकान मालिक उसी बरामदे के मलबे को साफ करा रहा था। छत गिरने के कारण कई शिवलिंग छतिग्रस्त हो गये थे। क्षतिग्रस्त शिविलिंग अन्य पत्थरों के टुक्डों के साथ मिल जाने के चलते उनकी पहचान नहीं हो पायी थी और रात में भ्रम के चलते मजदूरों व अन्य लोगों को यह दिखायी नहीं दिये। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने कहा कि पुलिस की विवचेना जारी है और धार्मिक भावना भड़काने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर जो चीजे पोस्ट की गयी है उसकी जांच करायी जा रही है जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।

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