वाराणसी :गरीबी और अशिक्षा सबसे बड़ा अभिशाप है । 13 वर्षीय सपना राजभर से बेहतर इसेकोइ दूसरा नहीं बखान कर सकता है । जन्मान्धता यानि माँ के पेट से ही नेत्रहीन पैदा हुई सपना । सपना की दिली तमन्ना थी कि वह भी अपनी आँखों से दूनिया की खुबसूरती अपनी आँखों से देखे । उसके इस सपने को साकार किया है वाराणसी नगर के समाजसेवी व प्रसिद्ध नेत्र सर्जन डा. अनुराग टण्डन ने । पिछले दिनों सपना की आँखों का टंडन नर्सिंग होम में आपरेशन किया गया और जब बुधवार को उसके आंखों से पट्टी खोली गई तो सपना के खुशी का ठिकाना नहीं रहा । उसने पहली बार अपनी आंखों से माँ-पिता व भाई-बहन को देखा । साथ ही उत्सुकतावश सड़क पर दौड़ती गाड़ियों के बारे में पुछाऔर प्रफुल्लित होती रही । दीनदयालपुर की रहने वाली सपना के पिताजी एक
किसान है । जन्म से अंधी सपना को लेकर जिस भी डाक्टर के पास जाते निराशा ही हाथ
लगती । इसी तरह भटकते वह पंजाबी अस्पताल पहुंचे यहां उनकी मुलाकात डा. अनुराग टन्डन से हुई । जांचोपरांत डा. टन्डन को पता चला कि सपना को दोनों आंखों में
मोतियाबिंद है । यह एक दुर्लभ किस्म की बीमारी थी , जो मां के पेट में ही होती है ।
डा. अनुराग टन्डन ने दूरभाष पर MVD INDIA NEWS को बताया कि सपना राजभर को कंजलाइटल कैटरेक्ट था ।यह दुर्लभ किस्म का मोतियाबिंद होता है , जिसमें मरीज माँ के पेट से ही अंधा होता है । सपना का सफलतापूर्वक आपरेशन हो चुका है ।

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