Siyarammishra Varanasi ●
वाराणसी , 17 अक्टूबर 2018 दिन बधवार ◆
बंगाल की तर्ज पर वाराणसी में भी शक्ति की अधिष्ठात्री देवी जगदंबा की नौ दिनी पूजा आराधना श्रृंखला शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मंगलवार को सप्तमी तिथि का शंख बजने के साथ ही शहर से लेकर गांव तक पूजा पंडालों में स्थापित माटी की देवी प्रतिमाएं मनभावन , ममतामयी , शक्तिस्वरूपा
हो उठीं । सुबह-सवेरे सभी मंडपों में तिथि मान विधिपूर्वक पुरोहितों ने प्राण-प्रतिष्ठा के शास्त्रीय अनुष्ठानों के बीच आदि शक्ति स्वरूपा देवी दुर्गा का आवाहन कर प्रतिमाओं के ओज-तेज को जागृत किया । इसके साथ तीन दिवसीय दुर्गोत्सव के विधानों का क्रम शुरु हुआ और पूजा मंडपों के पट-दर्शन-पूजन के लिए खोल दिए गए । ढाक के डंकों से गूंजे टोले-मोहल्ले , गांव-चौपाल और हवा का हर झोंका मन में उत्सवी उल्लास जगाता गुग्गल-लोबान की सुगंध से गमगमा उठा । उत्सव की निखरी रंगत निहारने के लिए दिनभर पूजा पाठ में जुटे श्रद्धालुओं ने शाम होन का इंतजार किया । सूरज ढलने के साथ उत्सव प्रिय काशी-निवासी बच्चे-बुढ़े , स्त्री-पुरुष घर परिवार के साथ रोशनी की बारिशों से नहाई शिवजी की नगरी काशी की सड़कों पर उतर आए । न कोई प्लान और न ही कोई नक्शा । किसी ने हथुआ मार्केट की ओर कदम बढ़ाए तो कोई भीड़ को चीरता जैतपुरा-मछोदरी या बंगाली टोला की गलियों में जा घुसा । मानों लग रहा था गांव-शहर की सारी सड़कें मुड़ गई हों और काशी के एक छोर से दूसरे छोर तक सजे पूजा पंडालों से जुड़ गई हों । यहां ऐसी मूर्ति… तो वहां वैसी प्रतिमा….हर तरफ बस यही बतकही और मेला घूमने वाले थकान को धता बताते इस पंडाल से उस मंडप तक टहलान मारते रहे ……

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