भारत संकट की इस घड़ी में दुनिया,समृद्ध देशों के लिए भी दवाईयों का संकट बहुत ज्यादा रहा है।अगर भारत दुनिया को दवाईयां न भी दे तो कोई भारत को दोषी नहीं मानता।हर देश समझ रहा है कि भारत के लिए भी उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों को बचाना है।लेकिन भारत ने अपनी संस्कृति के अनुरूप फैसला लिया कई बार हम अपनी शक्तियों को मानने से इनकार कर देते हैं और जब दूसरा देश रिसर्च करके वही बात बताता है तो हम मान लेते हैं। भारत की युवा पीढ़ी को इस चुनौती को स्वीकार करना होगा। जैसे विश्व ने योग को स्वीकार किया है वैसे ही आयुर्वेद को विश्व जरूर स्वीकार करेगा । रमजान का भी पवित्र महीना शुरू हो गया है। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि रमजान में इतनी बड़ी मुसीबत होगी। लेकिन जब विश्व में मुसीबत आ ही गई है तो हमें इसे सेवाभाव की मिसाल देनी है। हम पहले से ज्यादा इबादत करें और कोरोना के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करें ।
देश के हर हिस्से मेंदवाईयों को पहुंचाने के लिए ‘लाइफ-लाइन उड़ान’ नाम से एक विशेष अभियान चल रहा है। हमारे इन साथियों ने इतने कम समय में देश के भीतर ही 3 लाख किलोमीटर की हवाई उड़ान भरी है और 500 टन से अधिक मेडिकल सामग्री देश के कोने-कोने में पहुंचाई है ।


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