July 6, 2026

 एमपी फंड का 7 हजार 900 करोड़ रूपया कंसालीडेटेड फंड में – अजय मिश्रा

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 दो वर्षो के लिए एमपी फंड सिर्फ कोविड से लड़ाई के लिए खर्च होगा।

केन्द्रीय मंत्रियों की तनख्वाह का 30 फीसीदी राशि एक वर्ष के लिए खर्च की जाएगी कोरोना से लड़ाई में कोरोना से लड़ने ​के लिए केन्द्र सरकार ने दो बड़े निर्णय लिये हैं। अध्यादेश लाकर0 केन्द्र सरकार इन निर्णयों को लागू करेगी। पहला निर्णय प्रधानमंत्री समेत सभी मंत्री और एमपी की तनख्वाह से 30 प्रतिशत कटौती की जाएगी फाइनेंशियल ईयर 2020—2021 के दौरान।

पीएम मोदी का दूसरा फैसला यह है कि एमपी फंड का दो वर्षों तक पूरा पैसा कोविड बीमारी से लड़ाई के लिए जाएगा। यानी कि फाइनेंशियल ईयर 2020—2021 और फाइनेंशियल ईयर 2021—2022 तक एमपी फंड देश के कांसलीडेंट फंंड में जमा किया जाएगा जोकि 7 हजार 900 करोड़ रूपया होता है।

केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने प्रेस कांफ्रेंस के जरिये इस बात की सूचना दी कि राज्य की सरकारे अपने नियम और कानून के हिसाब से इस फैसले को लागू करेंगी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट बैठक के बाद एक अहम बैठक पीएम मोदी अपने मंत्रियों के साथ कर रहे हैं जिसमें कोविड से रिलेटेड अनुभवों को साझा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कल के प्रकाश कार्यक्रम से पूरी दुनिया में मैसेज गया कि भारतवासी एक है और इस लड़ाई को गंभीरतापूर्वक लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिन प्रतिदिन कोरोना की स्थिति बदल रही है। ऐसे में प्रतिदिन देश की जनता को प्रेस कांफ्रेंस कर अवगत कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उचित समय पर लाकडाउनक को खत्म् करने के लिए निर्णय लिया जाएगा।

प्रकाश जावेडकर ने बताया कि सरकार ने गरीब कल्याण योजना के लिए बड़ी रकम जारी की है और उद्योगोें और समाज के दूसरे घटकों को जो सहूलियते दी है उसकी भी बड़ी कीमत है।
साड़े तीन लाख करोंड़ रूपया ​पैसों की तरलता को बड़ाने के लिए खर्च किये जा रहे हैं।

दान की शुरूआत अपने घर से होती है

केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने कहा कि चैरेटी बिगेन एट होम। यानि की सभी मंत्री और एमपी चाहते थे कि वह कुछ करें लेकिन नियमों के चलते कुछ खास नहीं हो पा रहा था। अब अध्यादेश लाकर एमपी फंड को कोविड बीमारी से लड़ाई में खर्च किया जाएगा।